जैसलमेर में सिंचाई पानी की मांग को लेकर नहरी क्षेत्र के किसानों का आक्रोश शनिवार को लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा। नहर विभाग के अधिकारियों के जरिए पूर्व में दिए गए आश्वासनों और तय शिड्यूल के अनुसार पानी न मिलने के कारण आंदोलन स्थगित किया गया था। जिसे शुक्रवार को जीरो हेड पर दुबारा अनिश्चितकालीन धरने के रूप में शुरू हो गया। इसी बीच किसानों ने चेतावनी दी है कि समाधान नहीं निकाला तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। लिखित आश्वासन मिलने पर भी कार्रवाई नहीं किसानों का कहना है कि जैसलमेर जोन के हिस्से का कुल सिंचाई पानी करीब 1800 क्यूसेक बनता है, लेकिन वर्तमान में काफी ज्यादा कम आपूर्ति होने के कारण नहर का पानी अंतिम छोर तक बिल्कुल नहीं पहुंच पा रहा है। पिछले रविवार को सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ हुई वार्ता में तय शिड्यूल के अनुसार नहर चलाने का लिखित और मौखिक भरोसा मिलने पर किसानों ने बुधवार तक अपना धरना स्थगित किया था। हालांकि, जमीनी स्तर पर स्थिति में कोई सुधार न होने और पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसने की मजबूरी के चलते किसानों को दोबारा सड़कों पर उतरना पड़ा है। प्रशासन पर सुध नहीं लेने के लगाए आरोप शनिवार को दूसरे दिन भी जारी इस धरने के दौरान प्रशासन और नहर विभाग की कार्यशैली को लेकर किसानों में गहरा असंतोष देखा गया। विभाग के कोई जिम्मेदार अधिकारी और न ही प्रशासनिक अमला मौके पर किसानों की सुध लेने पहुंचा। इससे आक्रोशित किसानों ने अब आर-पार की लड़ाई का बड़ा ऐलान कर दिया है। किसान नेताओं ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने तुरंत कोई सकारात्मक समाधान नहीं निकाला, तो आंदोलन को और अधिक तीव्र किया जाएगा। नहर का पानी अंतिम छोर तक नहीं पहुंच पा रहा किसानों का स्पष्ट आरोप है कि विभागीय वादों के बावजूद जैसलमेर जोन को उसके हिस्से का पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। जिसके कारण खेतों में खड़ी हरी-भरी फसलें सूखने की कगार पर पहुंच चुकी हैं और अन्नदाताओं की महीनों की मेहनत बर्बाद होने की कगार पर है। ये रहे मौजूद धरना स्थल पर साहबान खान, पूनम सिंह, मोहनसिंह राजपुरोहित, राजू सिंह, भंवर राम बिश्नोई, हनुमानराम बिश्नोई, ईशान भाटी, नजीर खान, अली खान, एडवोकेट हसन खान सांवरा, कादर खान, प्रकाश, गिरधारी, सुरेश, राजू पूनिया, नारायण, मांगीलाल, साबिर खान, असगर खान, मामराज बिश्नोई, थानाराम चौधरी, लालाराम चौधरी, चतुरसिंह, मुबारक खान, हुकमाराम और हरजीराम भांभू सहित क्षेत्र के सैकड़ों किसान मौजूद रहे। किसानों ने एक स्वर में हुंकार भरी है कि जब तक उनके खेतों तक पर्याप्त सिंचाई पानी नहीं पहुंच जाता, तब तक यह अनिश्चितकालीन आंदोलन किसी भी कीमत पर समाप्त नहीं होगा।