जैसलमेर जिले के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है क्योंकि जैसलमेर नगर परिषद और पोकरण नगर पालिका के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव का बिगुल बज चुका है। खास बात यह है कि उम्मीदवारों के पास अपनी दावेदारी पेश करने के लिए केवल एक ही दिन (16 सितंबर) का वक्त होगा, जो सियासी दलों के लिए किसी 'अग्निपरीक्षा' से कम नहीं है। तय कार्यक्रम के अनुसार, 15 सितंबर को चुनाव की आधिकारिक सूचना जारी की जाएगी। 16 सितंबर तक नामांकन फॉर्म भरे जा सकेंगे और 17 सितंबर को फॉर्मों की जांच होगी। उम्मीदवार 18 सितंबर दोपहर 3 बजे तक अपना नाम वापस ले सकेंगे। नाम वापसी की समय सीमा खत्म होते ही 18 सितंबर को ही उम्मीदवारों को चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिए जाएंगे। सभापति का चुनाव 21 को होगा अध्यक्ष (सभापति) पद के लिए 21 सितंबर को सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक वोट डाले जाएंगे। वोटिंग खत्म होते ही उसी दिन मतगणना कर नतीजों की घोषणा की जाएगी। इसके बाद अगले दिन 22 सितंबर को उपाध्यक्ष पद के लिए प्रक्रिया शुरू होगी। उपाध्यक्ष के लिए उम्मीदवार सुबह 11 बजे तक नामांकन कर सकेंगे। दोपहर 2 बजे तक नाम वापस लिए जा सकेंगे और जरूरत पड़ने पर दोपहर 2:30 बजे से शाम 5 बजे तक वोटिंग होगी। वोटिंग के तुरंत बाद गिनती कर परिणाम जारी कर दिए जाएंगे। जिला निर्वाचन अधिकारी अनुपमा जोरवाल ने स्पष्ट किया है कि पूरी निर्वाचन प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने सभी पुख्ता तैयारियां पूरी कर ली हैं। निकाय चुनाव परिणाम और बोर्ड गठन की स्थिति जैसलमेर नगर परिषद (कुल 45 वार्ड): यहां हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 25 वार्डों पर जीत दर्ज कर पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है। वहीं, कांग्रेस पार्टी 16 वार्डों तक सिमट गई, जबकि 4 वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे। स्पष्ट बहुमत के साथ जैसलमेर में भाजपा आसानी से अपना बोर्ड बनाने के करीब है। पोकरण नगर पालिका (कुल 25 वार्ड): पोकरण में मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है क्योंकि यहां किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। यहाँ कांग्रेस ने 12 वार्डों में और भाजपा ने 11 वार्डों में जीत हासिल की है, जबकि 2 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी जीते हैं। बोर्ड बनाने (बहुमत के लिए 13 का जादुई आंकड़ा) के लिए दोनों प्रमुख दल जोड़तोड़ में जुट गए हैं, ऐसे में निर्दलीय पार्षद 'किंगमेकर' की भूमिका में हैं और उनके समर्थन से ही तय होगा कि बोर्ड किसका बनेगा।