जसोल। में श्रावण शुक्ल पक्ष त्रयोदशी के अवसर पर जसोल धाम स्थित श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान में बुधवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। सुबह से ही भक्तों के आने का सिलसिला शुरू हो गया। श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर श्री राणीसा भटियाणीसा, श्री बायोसा, श्री सवाई सिंह जी, श्री लाल बनासा, श्री खेतलाजी और श्री काला गौरा भैरूजी के मंदिरों में दर्शन-पूजन किया। दिनभर मंदिर परिसर मां जसोल के जयकारों और भक्ति गीतों से गूंजता रहा। त्रयोदशी के अवसर पर संस्थान की ओर से सर्वसमाज जसोल की कन्याओं का विधि-विधान से कन्या पूजन किया गया। कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनके चरण पूजे गए तथा फल और प्रसाद अर्पित किया गया। इसके बाद कन्याओं को भोजन-प्रसाद भी करवाया गया। आयोजकों ने बताया कि कन्या पूजन सनातन संस्कृति में मातृशक्ति के प्रति सम्मान और श्रद्धा का प्रतीक है। भजनों से भक्तिमय हुआ माहौल जसोल धाम में त्रयोदशी के विशेष भक्ति कार्यक्रमों के तहत स्थानीय भजन गायकों ने राणीसा भटियाणीसा की महिमा का गुणगान किया। भक्ति प्रस्तुतियों के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालु भक्तिरस में डूबे नजर आए। सायंकाल लाइव आरती का आयोजन किया जाएगा। इसके माध्यम से देश-विदेश में रहने वाले मां जसोल के भक्त ऑनलाइन आरती और दर्शन का लाभ ले सकेंगे। वहीं रात में भव्य जागरण होगा, जिसमें भजन प्रस्तुतियों के जरिए राणीसा भटियाणीसा की महिमा का गुणगान किया जाएगा। कुंवर हरिशचंद्र सिंह जसोल ने अर्पित किया भोग इस अवसर पर रावलगढ़, जसोल से कुंवर हरिशचंद्र सिंह जसोल पवित्र थाल में भोग-प्रसाद लेकर जसोल धाम पहुंचे। उन्होंने राणीसा भटियाणीसा के श्रीचरणों में श्रद्धापूर्वक भोग-प्रसाद अर्पित किया। उन्होंने समस्त भक्तों, विकसित जसोल और क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति एवं खुशहाली की मंगलकामना की। सीसीटीवी और पब्लिक अनाउंसमेंट से निगरानी श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए संस्थान की ओर से दर्शन, सुरक्षा और सुविधा के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की गईं। मंदिर परिसर की सीसीटीवी कैमरों से लगातार निगरानी की गई। पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम के जरिए श्रद्धालुओं को आवश्यक सूचनाएं दी गईं। गर्मी और उमस से राहत के लिए मिस्टिंग सिस्टम और छायादार टेंट, शीतल पेयजल, प्रसाद अर्पित करने की सुव्यवस्थित व्यवस्था और भोजन-प्रसाद की सुविधा उपलब्ध कराई गई। बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए गोल्फ कार्ट वृद्धजनों और दिव्यांग श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्हीलचेयर एक्सेस और गोल्फ कार्ट की व्यवस्था की गई। इससे उन्हें मंदिर परिसर में आवागमन और दर्शन में सुविधा मिली। संस्थान के कार्मिकों और सेवाभावी कार्यकर्ताओं ने विभिन्न व्यवस्थाओं में सहयोग करते हुए श्रद्धालुओं के सुगम दर्शन, सुरक्षा और सुविधा का विशेष ध्यान रखा। ‘श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा देना संस्थान का दायित्व’ कुंवर हरिशचंद्र सिंह जसोल ने कहा कि श्रावण शुक्ल पक्ष त्रयोदशी का मां जसोल के भक्तों की आस्था में विशेष महत्व है। मां जसोल के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट श्रद्धा उन्हें दूर-दूर से जसोल धाम तक लेकर आती है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक श्रद्धालु को सुगम दर्शन, सुरक्षित वातावरण और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना संस्थान का प्रमुख दायित्व है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए व्यवस्थाओं को लगातार अधिक सुव्यवस्थित और सुविधाजनक बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कन्या पूजन सनातन संस्कृति में मातृशक्ति के प्रति श्रद्धा और सम्मान का पवित्र भाव है। मां जसोल की कृपा से जसोल धाम आस्था, सेवा और भक्ति के केंद्र के रूप में निरंतर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने मां जसोल से सभी भक्तों के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली बनाए रखने की मंगलकामना की।