झालावाड़ के राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में 25 से 31 अगस्त तक संस्कृत सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। इसके पहले दिन उद्घाटन सत्र आयोजित हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. रिंकेश कुमार यादवेन्द्र रहे, जबकि कॉलेज के ​प्रिंसिपल प्रो. राम कल्याण मीणा ने अध्यक्षता की। प्रो. जीके मालवीय विशिष्ट अतिथि थे। मुख्य अतिथि ने आयुर्वेद चिकित्सा के माध्यम से मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। प्रिंसिपल मीणा ने कहा कि संस्कृत हमारी विरासत है, जिसे हमें संभालकर रखना है। उन्होंने इसे भारत के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला बताया। 'संस्कृत साहित्य में भारत का गौरवशाली इतिहास' विशिष्ट अतिथि प्रो. जीके मालवीय ने कहा कि संस्कृत साहित्य में भारत का गौरवशाली इतिहास विद्यमान है, जो भविष्य के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है। इसे संजोकर रखने की महती आवश्यकता है। प्रो. अलका बगला ने अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्कृत स्वागत गीत प्रस्तुत किया। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा में संस्कृत वाङ्मय की महत्ता बताते हुए इसे आधुनिकता से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। प्रतियोगिताओं का भी आयोजन दूसरे सत्र में संस्कृत गीत एवं श्लोक पाठ प्रतियोगिता आयोजित हुई, जिसकी अतिथि डॉ. प्रमिला शर्मा रहीं। उन्होंने कहा कि संस्कृत साहित्य में भारतीय संस्कृति, दर्शन एवं अध्यात्म की जड़ें विद्यमान हैं और यही हमारी पहचान है। इस अवसर पर निबंध लेखन, सूक्ति लेखन, प्रश्नोत्तरी एवं पोस्टर प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। प्रतियोगिताओं में भाग्यश्री हाड़ा, विनीता गौड़, चंदा राठौर, बीरम सिंह, दीक्षा, राकेश, निकिता, मोनिका, आशा, यश, गौरी, विशाल सेन, गौरव सेन सहित कई विद्यार्थियों ने भाग लिया।