तीर्थ यात्रा के दौरान अपने परिवार से बिछड़े बुजुर्ग राजकुमार उर्फ बाबूराम को मंगलवार को झालावाड़ में उनके बेटे और भतीजे से मिलाया गया। यह भावुक मिलन साईं मुख्यमंत्री पुनर्वास गृह, झालावाड़ के अथक प्रयासों से संभव हो पाया। झालावाड़ पुलिस 21 अगस्त की रात करीब 12:05 बजे बुजुर्ग बाबूराम को पुनर्वास गृह लेकर आई थी। पुलिस के अनुसार वे बेघर अवस्था में इधर-उधर घूमते मिले थे। पुनर्वास गृह में आने के बाद बुजुर्ग बार-बार बाहर जाने की बात कहने लगे, जिससे उनकी बेचैनी स्पष्ट थी। उनकी बेचैनी को देखते हुए संस्था मैनेजर सौरभ सिंह ने उनकी फाइल में दर्ज जानकारी के आधार पर परिवार की तलाश शुरू की। पंजाब में परिवार का पता लगाना आसान नहीं था, लेकिन लगातार प्रयास करते हुए उन्होंने पुलिस और कई थानों से संपर्क किया। अंततः संबंधित गांव के सरपंच का नंबर मिला और उनके माध्यम से परिवार तक सूचना पहुंची। इसके बाद बुजुर्ग के बेटे नवनीत कुमार का फोन आया। वीडियो कॉल के जरिए जब पिता-पुत्र की बात कराई गई तो दोनों भावुक हो गए। परिवार के अन्य सदस्यों ने भी वीडियो कॉल पर बाबूराम से बातचीत की। बेटे ने संस्था से आग्रह किया कि उनके पिता को सुरक्षित रखा जाए, वह जल्द झालावाड़ पहुंचेंगे। इसके बाद नवनीत कुमार अपने भतीजे केवल कृष्ण के साथ पंजाब से झालावाड़ पहुंचे। पिता को सामने देखते ही नवनीत कुमार और केवल कृष्ण भावुक होकर उनसे गले मिले। परिजनों के अनुसार राजकुमार उर्फ बाबूराम 8 अगस्त को करणी खेड़ा से घूमने और तीर्थ यात्रा के लिए निकले थे। यात्रा के दौरान वे गलती से दूसरी ट्रेन में बैठ गए और गुना पहुंच गए। वहां से दूसरी ट्रेन में बैठकर झालावाड़ सिटी पहुंचे और परिवार से बिछड़ गए थे। पिता को साथ लेकर जाते समय नवनीत कुमार ने संस्था का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी वजह से आज उन्हें दोबारा अपने सिर पर पिता का साया मिल पाया है। संस्था संचालिका प्रतिमा चौहान ने बताया कि इस पूरे प्रयास में रामअवतार, महिला प्रभारी अमरीन कौसर, पंकज मालवी, कमलेश कुमार, राजेंद्र सिंह और विकास मेरोठा सहित समस्त स्टाफ का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। सभी की मेहनत आखिरकार रंग लाई और एक बिछड़ा हुआ परिवार फिर से एक हो गया।