जिले में नगरीय निकाय चुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों में टिकटों की दौड़ तेज हो गई है। झुंझुनूं नगर परिषद और जिले की 18 नगरपालिकाओं में पार्षद पद के लिए दावेदारों की लंबी कतार है। दोनों प्रमुख दलों में लगातार बैठकों का दौर जारी है, जहां वार्डवार समीकरण, सामाजिक संतुलन और जीत की संभावनाओं पर गहन मंथन किया जा रहा है। कांग्रेस में अब तक 1500 से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, जबकि भाजपा में करीब 1350 से अधिक दावेदारों ने टिकट के लिए आवेदन किया है। दोनों दलों में आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब वरिष्ठ नेताओं की बैठकों का दौर शुरू हो गया है। माना जा रहा है कि 28 अगस्त के बाद टिकटों की पहली सूची जारी हो सकती है। वहीं बगावत को रोकने के लिए सीनियर नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है। भाजपा जोखिम लेने के मूड में नहीं भाजपा इस बार टिकट वितरण में किसी भी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं है। पार्टी प्रत्येक वार्ड में दावेदारों की सामाजिक स्वीकार्यता, संगठन में सक्रियता, जनसंपर्क और चुनाव जीतने की क्षमता का आकलन कर रही है। जानकारी के अनुसार, स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले पैनल पर जिलास्तरीय और प्रदेश नेतृत्व की राय ली जाएगी। वरिष्ठ पदाधिकारियों, मंडल अध्यक्षों और संगठन से जुड़े नेताओं के फीडबैक के साथ सर्वे रिपोर्ट को भी महत्व दिया जाएगा। पार्टी का लक्ष्य ऐसे प्रत्याशियों को मैदान में उतारना है, जिनके पक्ष में स्थानीय माहौल मजबूत हो और जीत की संभावना अधिक हो। कांग्रेस का नए और पुराने चेहरों का संतुलन कांग्रेस भी टिकट वितरण को लेकर पूरी सतर्कता बरत रही है। पार्टी इस बार अनुभवी नेताओं के साथ नए चेहरों को भी अवसर देने की रणनीति पर काम कर रही है। जिलाध्यक्ष, प्रभारी नेताओं, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों की राय के आधार पर वार्डवार नामों पर चर्चा की जा रही है। अंतिम सूची जारी होने से पहले प्रत्येक दावेदार की राजनीतिक सक्रियता, स्थानीय छवि और जीत की संभावना का मूल्यांकन किया जा रहा है। समीकरणों पर मंथन भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों में लगातार संगठनात्मक बैठकें हो रही हैं। वार्ड प्रभारियों, संयोजकों और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं से फीडबैक लिया जा रहा है। जातीय एवं सामाजिक समीकरण, बूथ स्तर की स्थिति, स्थानीय विवाद, पिछले चुनावों का प्रदर्शन और दावेदारों की सक्रियता को ध्यान में रखते हुए टिकट तय करने की तैयारी चल रही है। सोशल मीडिया पर दावेदारी टिकट की घोषणा से पहले ही कई संभावित दावेदार सोशल मीडिया पर खुद को पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी बताने वाले पोस्टर और प्रचार सामग्री साझा कर रहे हैं। इससे दोनों दलों के संगठन को शिकायत भी मिल रही है। पार्टी पदाधिकारी कार्यकर्ताओं से अधिकृत घोषणा से पहले किसी प्रकार का दावा नहीं करने की अपील कर रहे हैं। बगावत रोकने की तैयारी टिकट वितरण के बाद संभावित असंतोष को देखते हुए भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अभी से डैमेज कंट्रोल की रणनीति तैयार कर ली है। जिन वार्डों में एक से अधिक मजबूत दावेदार हैं, वहां वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी दी जा रही है ताकि टिकट घोषित होने के बाद नाराजगी को समय रहते दूर किया जा सके। दोनों दलों में बड़ी संख्या में संगठन से जुड़े पदाधिकारी, बूथ प्रभारी और उनके परिवार के सदस्य भी टिकट की दौड़ में शामिल हैं। ऐसे में संगठन के भीतर यह चर्चा भी है कि यदि बड़ी संख्या में संगठन के पदाधिकारी चुनाव मैदान में उतरेंगे तो बूथ प्रबंधन और चुनाव संचालन की जिम्मेदारी कौन संभालेगा। यही कारण है कि टिकट वितरण में संगठनात्मक जरूरतों को भी प्रमुखता दी जा रही है। 28 अगस्त के बाद साफ होगी तस्वीर भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों में आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब अंतिम मंथन का दौर शुरू होगा। सर्वे रिपोर्ट, स्थानीय समीकरण, वरिष्ठ नेताओं की राय और जीत की संभावना के आधार पर उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा। ऐसे में जिले की एक नगर परिषद और 18 नगरपालिकाओं में टिकटों का सस्पेंस 28 अगस्त के बाद खत्म होने की संभावना है। तब तक राजनीतिक गलियारों में बैठकों, लॉबिंग और दावेदारों की सक्रियता लगातार बनी रहेगी।