जोधपुर नगर निगम चुनाव के 100 में से 99 वार्ड के परिणाम जारी हो चुके हैं। इसमें अब तक किसी को स्पष्ट जनादेश नहीं मिला है। वार्ड संख्या 50 का परिणाम ईवीएम में तकनीकी खराबी के कारण रोक दिया गया है। जहां एक बूथ पर दोबारा मतदान करवाने की संभावना है। 100 वार्डों वाले जोधपुर निगम में BJP और कांग्रेस दोनों पार्टियां 44-44 सीटों पर सिमट गई हैं। वहीं 10 सीटों पर निर्दलीयों ने बाजी मारी है। इसके अलावा 1 सीट आरएलपी के खाते में गई है। प्रदेश में सत्ता होने के कारण भाजपा के पास बोर्ड बनाने का एडवांटेज नजर आ रहा है। हालांकि कांग्रेस भी निर्दलीयों को साधकर सियासी गुणा-भाग में जुटी है। दोनों ही खेमों में महापौर की कुर्सी को लेकर रस्साकशी शुरू हो गई है। दोनों पार्टी में से किसी एक का बोर्ड बनने पर मेयर पद के लिए ये बडे़ नेता रेस में नजर आ रहे हैं। इधर, 21 सितंबर को होने वाले मेयर और 22 सितंबर को होने वाले डिप्टी मेयर के चुनाव स्थगित कर दिए है। दरअसल, 50 नंबर वार्ड के बूथ नंबर 338 की ईवीएम में खराबी के कारण सोमवार को इस वार्ड की काउंटिंग होल्ड कर दी थी। इसके बाद शाम को दोबारा चुनाव करवाने का​ निर्णय लिया गया। दो नगर निगम मर्ज करने का असर भाजपा का बोर्ड बनने पर महापौर पद के ये संभावित चेहरे मेघराज लोहिया: राजसिको के रहे चेयरमैन वरिष्ठ भाजपा नेता मेघराज लोहिया ने वार्ड संख्या 42 से कांग्रेस के जिलाध्यक्ष ओंकार वर्मा को 279 वोटों से हराकर अपनी ताकत का अहसास कराया है। पूर्व में राजसिको के चेयरमैन रह चुके लोहिया का दावा भाजपा का बोर्ड बनने की स्थिति में सबसे मजबूत माना जा रहा है। वे पार्टी के बेहद वरिष्ठ कार्यकर्ता होने के साथ-साथ पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बेहद करीबी माने जाते हैं। इसका सीधा फायदा उन्हें मिल सकता है। इसके अलावा जोधपुर की राजनीति में माहेश्वरी समाज के राजनीतिक वर्चस्व और इस बार समाज की मजबूत दावेदारी को देखते हुए भी लोहिया रेस में सबसे आगे चल रहे हैं। हालांकि उनका कमजोर पक्ष यह माना जा रहा है कि आम कार्यकर्ताओं के बीच उनकी पहुंच थोड़ी सीमित रही है। वसुंधरा गुट से जुड़े होने का खमियाजा भी उन्हें अंदरूनी राजनीति में भुगतना पड़ सकता है। प्रसन्नचंद मेहता: भाजपा जिलाध्यक्ष-प्रदेश उपाध्यक्ष पदों पर रहे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से आने वाले प्रसन्नचंद मेहता ने वार्ड 82 से कांग्रेस के अरविंद परिहार को 400 वोटों से हराया है। मेहता संगठन के पुराने सिपाही हैं और भाजपा में जिलाध्यक्ष से लेकर प्रदेश उपाध्यक्ष जैसे कई अहम पदों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। असम के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया से उनकी नजदीकी और निचले स्तर पर कार्यकर्ताओं के साथ सीधा जुड़ाव उनकी दावेदारी को बेहद मजबूत बनाता है। हालांकि उनके रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा जातीय समीकरण बन सकता है। जोधपुर शहर से इसी समाज के अतुल भंसाली विधायक हैं। ऐसे में पार्टी के लिए एक ही समाज के दो बड़े नेताओं को शहर के दो सबसे प्रमुख पदों पर बैठाना राजनीतिक रूप से थोड़ा मुश्किल नजर आ रहा है। कमलेश पुरोहित: ब्राह्मण समाज के बड़े चेहरे महापौर की रेस में तीसरा बड़ा नाम कमलेश पुरोहित का है। इन्होंने वार्ड 25 से कांग्रेस के आनंद राठी को बेहद कड़े मुकाबले में 70 वोटों से मात दी है। कमलेश नगर सुधार न्यास में न्यासी के रूप में पहले काम कर चुके हैं। ब्राह्मण समाज का बड़ा चेहरा होने के कारण भी पार्टी आलाकमान उनके नाम पर गंभीरता से विचार कर सकता है। हालांकि पुरोहित के साथ भी जातीय समीकरण का पेच फंसा हुआ है। वे जिस विधानसभा क्षेत्र से पार्षद का चुनाव जीतकर आए हैं। वहां से स्थानीय विधायक भी ब्राह्मण समाज से ही आते हैं। इस वजह से संगठन स्तर पर उनकी दावेदारी थोड़ी कमजोर पड़ सकती है। कांग्रेस का बोर्ड बनने पर महापौर पद के ये संभावित चेहरे नरेश जोशी: कई वरिष्ठ कांग्रेसी नेता समर्थन में कांग्रेस का बोर्ड बनने की स्थिति में नरेश जोशी महापौर पद के सबसे प्रबल दावेदार बनकर उभरे हैं। जोधपुर में ब्राह्मण समाज के प्रमुख चेहरे और पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष रह चुके जोशी ने वार्ड 40 से भाजपा के पूर्व उप-महापौर देवेंद्र सालेचा को 299 वोटों से शिकस्त दी है। अशोक गहलोत के शासनकाल में संगठन चलाने का उनका अनुभव काफी काम आ सकता है। चूंकि शहर में भाजपा के पास ब्राह्मण जिलाध्यक्ष और एक विधायक इसी समाज से हैं, इसलिए कांग्रेस ब्राह्मण वोट बैंक में सेंध लगाने और रणनीतिक बढ़त हासिल करने के लिए नरेश जोशी पर दांव खेल सकती है। कई वरिष्ठ कांग्रेसी नेता भी खुलकर उनके समर्थन में हैं। हालांकि ब्राह्मण समाज को पारंपरिक रूप से भाजपा का कोर वोटर माना जाता है। ऐसे में अगर कांग्रेस अपने खुद के पारंपरिक कोर वोटर ओबीसी, दलित या अल्पसंख्यक से किसी चेहरे को तवज्जो देने का फैसला करती है तो जोशी रेस से बाहर भी हो सकते हैं। गणपत सिंह चौहान: निगम में रह चुके नेता प्रतिपक्ष वरिष्ठ कांग्रेसी नेता गणपत सिंह चौहान ने वार्ड संख्या 55 में भाजपा के मनीष शर्मा को 104 वोटों के नजदीकी अंतर से हराया है। पूर्व में नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा चुके गणपत सिंह के पास निगम की अंदरूनी कार्यप्रणाली और प्रशासनिक कामकाज का लंबा अनुभव है, जो उनका सबसे बड़ा मजबूत पक्ष है। हालांकि अगर पार्टी जातीय समीकरणों को साधने की कोशिश करती है तो चौहान के रास्ते में रुकावट आ सकती है। जोधपुर शहर विधानसभा सीट से चुनाव में इसी समाज के प्रत्याशी को टिकट दिया गया था, इसलिए पार्टी संतुलन बनाने के लिए किसी अन्य वर्ग या समाज के प्रतिनिधि को मौका देने का विचार कर सकती है। प्रदीप गांग: 22 तक राजनीति से रहे दूर, अंदरूनी नाराजगी भी करीब 22 साल के लंबे अंतराल के बाद सीधी चुनावी राजनीति में उतरे प्रदीप गांग ने वार्ड संख्या 22 से एक बड़ा उलटफेर करते हुए विश्व हिंदू परिषद के दिग्गज नेता और प्रसिद्ध सर्जन डॉ. राम गोयल की बेटी सुगंधा गोयल को 212 वोटों से हरा दिया। सुगंधा गोयल खुद भाजपा का बोर्ड बनने की स्थिति में महापौर पद की प्रबल दावेदार मानी जा रही थीं। प्रदीप गांग ओसवाल जैन समाज से ताल्लुक रखते हैं, जिसका जोधपुर की शहरी राजनीति और व्यापारिक तबके पर गहरा प्रभाव है। हालांकि उनकी राह उतनी आसान भी नहीं है। लंबे समय तक मुख्यधारा की राजनीति से दूर रहने के कारण स्थानीय संगठन के ही कई नेताओं में उनकी उम्मीदवारी को लेकर अंदरूनी नाराजगी देखी जा रही है, जो उनके दावे को कमजोर कर सकती है। निर्दलीय बन सकते किंगमेकर फिलहाल दोनों ही खेमों में बैठकों का दौर जारी है। जोधपुर नगर निगम में जीते 10 निर्दलीयों और 1 RLP पार्षद की भूमिका इस चुनाव में किंगमेकर की होने वाली है। हालांकि दोनों ही पक्ष के निर्दलीयों को अपने खेमे में लाने को लेकर प्रयास चल रहे हैं। कांग्रेस और भाजपा दोनों ने ही 6 से 7 निर्दलीयों के अपने समर्थन में होने का दावा किया है। यह खबर भी पढ़ें... जोधपुर निगम: भाजपा के 44,कांग्रेस के 44 प्रत्याशी जीते:कांग्रेस की पूर्व मेयर-शहर जिलाध्यक्ष हारे; वार्ड 50 में EVM में परेशानी से परिणाम रुका जोधपुर नगर निगम चुनाव के 100 वार्डों में से 99 सीटों की मतगणना हो गई है। वार्ड 50 में एक EVM खराब होने पर काउंटिंग रोक दी गई है। अब तक भाजपा के 44 और कांग्रेस के 44 उम्मीदवार जीते हैं। वहीं अन्य के 11 प्रत्याशी हैं, जिसमें एक RLP प्रत्याशी भी है। (पूरी खबर पढ़ें)