कोटा में मेयर पद के लिए शुक्रवार को हुए चुनाव में बीजेपी का महापौर बनना तय था। बीजेपी के पास बहुमत से 6 पार्षद ज्यादा थे। इसके अलावा दो निर्दलीयों ने भी समर्थन कर दिया, लेकिन असली खेल कांग्रेस के साथ हो गया। कांग्रेस की मेयर प्रत्याशी को खुद की पार्टी के पूरे वोट नहीं मिल सके। कांग्रेस पार्षदों ने क्रॉस वोटिंग कर दी। कांग्रेस मेयर प्रत्याशी सुनीता सुमन को 35 वोट मिले हैं, जबकि पार्टी के 39 पार्षद थे। कांग्रेस के चार पार्षदों ने क्रॉस वोटिंग की है। बीजेपी से जुडे़ सूत्रों ने बताया- बहुमत के बाद भी बीजेपी इस जुगाड़ में थी कि कांग्रेस में ज्यादा से ज्यादा क्रॉस वोटिंग करवाई जा सके। दरअसल, कोटा के जरिये प्रदेश में ये मैसेज देना था कि कोटा में बीजेपी काफी मजबूत है। वहीं विपक्ष के भी पार्षद आसानी से तोड़ सकती है। इसके लिए स्थानीय पार्टी नेताओं ने ऑपरेशन लोटस शुरू किया। कुछ ही बडे़ नामों को इसकी जानकारी थी। वहीं कांग्रेस नेता इतने ओवर कॉन्फिडेंस हो गए कि ये कहते रहे कि मेयर कांग्रेस का बनेगा और बीजेपी को सरप्राइज मिलेगा। हालांकि बीजेपी ने कांग्रेस को सरप्राइज कर दिया। बता दें कि एक निर्दलीय पार्षद ने कांग्रेस को समर्थन दिया। एक पार्षद का आखिरी समय तक पता नहीं लग सका। बीजेपी नेता बार-बार कहते रहे- कांग्रेसी संपर्क में हैं चुनाव खत्म होने पर बीजेपी ने निर्दलीयों को साधना शुरू किया। पार्टी से बागी होकर निर्दलीय चुनाव लडे़ पार्षद कौशल शर्मा और वंदना फौजदार को वापस से मनाया और पार्टी में शामिल करवाया। वे बाडे़बंदी में भी साथ रहे। बीजेपी चुनाव में कांग्रेस की क्रॉस वोटिंग को लेकर इतनी पुख्ता थी कि बार-बार बीजेपी नेता कहते रहे कि कांग्रेस पार्षद हमारे सपंर्क में हैं। इस दौरान निर्दलीय और कांग्रेसी पार्षदों पर प्रशासन का डंडा भी चला। कांग्रेस सिर्फ ये आरोप लगाती रह गई कि बीजेपी दबाव की राजनीति कर रही है, लेकिन कांग्रेस स्थिति को भांप ही नहीं सकी। ओवर कॉन्फिडेंस में रह गई कांग्रेस पार्षदों की वोटिंग खत्म होने के बाद कांग्रेस बेफिक्र हो गई थी। कांग्रेस नेता इतने ओवर कॉन्फिडेंस हो गए कि ये कहते रहे कि मेयर कांग्रेस का बनेगा और बीजेपी को सरप्राइज मिलेगा। हालांकि बीजेपी ने कांग्रेस को सरप्राइज कर दिया। दरअसल, कांग्रेस ने बीजेपी नेताओं के बयानों को हल्के में लिया। बीजेपी ने मेयर नामांकन और चुनाव से पहले बाडे़बंदी की और जो भी मनभेद थे, उन्हें दूर करने की कोशिश की। इधर, कांग्रेस ने पार्षदों की तरफ झांका ही नहीं। पार्षद किससे संपर्क में हैं। किससे चर्चा कर रहे हैं। इसकी जानकारी तक कांग्रेस नेताओं को नहीं लगी। अलग-अलग गुट होने के चलते किसी ने बाडे़बंदी या पार्षदों को एकजुट रखने की कवायद नहीं की। नतीजा, चार पार्षद क्रॉस वोटिंग कर गए।