हाड़ौती के प्रसिद्ध 133वें राष्ट्रीय दशहरा मेले का रविवार शाम को औपचारिक उद्घाटन किया गया। नगर निगम भले ही मेले की शुरुआत का दावा कर रहा हो, लेकिन उद्घाटन के वक्त भी मैदान का अधिकांश हिस्सा पूरी तरह खाली और वीरान पड़ा नजर आया। आलम यह है कि न तो अभी तक दुकानें पूरी तरह लगी और न ही झूलों का संचालन शुरू हुआ है। सबसे बड़ी बात ये है कि मेले के मुख्य सांस्कृतिक मंचों पर प्रस्तुति देने वाले कलाकारों तक के नाम अब तक तय नहीं हो सके हैं। निगम अधिकारियों के अनुसार- कार्यक्रमों को लेकर नामों पर चर्चा चल रही है। दुकानदार ग्राउंड पहुंच रहे हैं और दुकान लगाने में जुटे हैं। झूला संचालक भी झूलों पर रंग-रोगन करने में जुटे है। दुकानदारों की जद्दोजहद जारी, खाली पड़े हैं मैदान नगर निगम की ओर से स्थाई दुकानों और झूलों के आवंटन की प्रक्रिया अभी भी प्रक्रियाधीन ही चल रही है। रसीद कटने के बाद अब जाकर ग्राउंड पर काम शुरू हुआ है, जिसके चलते व्यापारी और झूला संचालक अपनी-अपनी जगह सेट करने में जुटे हुए हैं। उद्घाटन के समय गिने-चुने व्यापारी ही अपना सामान लेकर मैदान में पहुंचे थे और दुकानें लगाने का प्रयास कर रहे थे। इस बार भी फेज दो में कोई खास आकर्षण नहीं आ रहा है। अधूरे निर्माण को छिपाने के लिए लगाई आड़ मेले की तैयारियों में कमी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि श्रीराम रंगमंच पर चल रहे अधूरे निर्माण कार्य के कारण जमीन जगह-जगह से खुदी पड़ी है। उद्घाटन के दौरान इस अव्यवस्था और गड्ढों को छिपाने के लिए बाकायदा आड़ लगाकर ढका गया। हालांकि, नगर निगम परिसर, दशहरा मैदान और सीएडी सर्किल समेत प्रमुख सरकारी भवनों को रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया है। मैदान के मुख्य प्रवेश द्वार पर विशाल स्वागत द्वार बनाया गया है। क्रेन की मदद से खड़े किए जाएंगे रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतले तमाम अव्यवस्थाओं के बीच एकमात्र राहत की बात यह है कि विजयश्री रंगमंच के सामने रावण, कुंभकरण और मेघनाद के विशालकाय पुतले लगभग बनकर तैयार हो चुके हैं। दशहरे से एक दो दिन पहले इन पुतलों को मैदान में स्थापित कर दिया जाएगा। इस बार भी बिना पेड़ा बांधे बड़ी क्रेन की सहायता से पुतलों को खड़ा किया जाएगा और सुरक्षा के लिहाज से इन्हें लोहे के मजबूत रस्सों से बांधा जाएगा।