कोटा के महावीर नगर विस्तार योजना में 27 मार्च को ट्रांसफार्मर में लगी आग और हाई वोल्टेज से घरों के बिजली उपकरण जलने के मामले में मुआवजे को लेकर जेवीवीएनएल और केईडीएल ने जिम्मेदारी लेने से साफ मना कर दिया है। पीड़ितों को मुआवजा देने की मांग पर दोनों कंपनियों ने जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है। पीड़ित दयाल बाबू स्वामी ने करीब 50 हजार रुपए के नुकसान की भरपाई की मांग करते हुए स्थायी लोक अदालत याचिका लगाई थी। सुनवाई के दौरान दोनों कंपनियों ने जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया। अब सवाल है कि उपभोक्ता के नुकसान की भरपाई कौन करेगा? मामले में अगली सुनवाई 13 नवंबर को होगी। समाधान नहीं होने पर लोक अदालत का खटखटाया दरवाजा एडवोकेट सुजीत स्वामी ने बताया कि 27 मार्च 2026 को उनके घर के बाहर लगे ट्रांसफार्मर में भीषण आग लग गई थी। इस घटना के दौरान घर में हाई वोल्टेज आने से कई विद्युत उपकरण जल गए। उपकरणों की मरम्मत और नए उपकरणों से लगभग 50 हजार खर्च होने का दावा करते हुए नुकसान की भरपाई के लिए KEDL को लिखित शिकायत दी थी। शिकायत के बाद कंपनी की ओर से सर्वे भी किया गया और भुगतान का आश्वासन दिया गया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ जिसके बाद स्थायी लोक अदालत का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने पक्षकारों को नोटिस भेजकर मांगा जवाब अप्रैल 2026 में निजी बिजली कंपनी KEDL और JVVNL के जोनल मुख्य अभियंता के खिलाफ सेवा में कमी का आरोप लगाते हुए शिकायत दी गई। क्षतिग्रस्त उपकरणों की मरम्मत और नए उपकरणों पर खर्च हुई राशि, मानसिक कष्ट, असुविधा और सदमे के लिए 50 हजार के नुकसान की भरपाई व कानूनी खर्च के रूप में 20 हजार देने की मांग की गई। मामले की सुनवाई करते हुए स्थायी लोक अदालत ने दोनों पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। JVVNLका जिम्मेदारी से इनकार JVVNL ने अदालत मे जवाब पेश किया ओर बताया कि 1 सितंबर 2016 से कोटा शहर में बिजली संबंधी कार्यों की व्यवस्था KEDL द्वारा देखी जा रही है। JVVNL ने स्वयं को नुकसान की भरपाई के भुगतान के लिए जिम्मेदार नहीं मानते हुए उसके खिलाफ वाद रद्द करने की मांग की है। KEDL ने 132 केवी लाइन का मामला बताया घटना के लगभग 6 महीने बाद अक्टूबर में KEDL ने भी अदालत में आवेदन पेश कर मामले से अपना नाम हटाने की मांग की। कंपनी का कहना है कि मामला 132 केवी लाइन से संबंधित है, जो उसके क्षेत्राधिकार में नहीं आती और घटना 132 केवी लाइन टूटने के कारण हुई। KEDL को केवल कोटा शहर में बिजली व्यवस्था देखने वाली फ्रेंचाइजी होने के कारण पक्षकार बनाया गया है। इसलिए कंपनी ने न्यायहित में वाद से अपना नाम हटाने का अनुरोध किया है। सुजीत स्वामी ने सवाल उठाया कि JVVNL घटना की जांच और भुगतान की जिम्मेदारी से मना कर रहा है। KEDL का कहना है कि 132 केवी लाइन उसके क्षेत्राधिकार में नहीं आती, तो नुकसान झेलने वाले उपभोक्ता को मुआवजा कौन देगा? 45 दिन में क्षतिपूर्ति के प्रावधान का हवाला सुजीत स्वामी ने बताया कि "राजस्थान विद्युत नियामक आयोग के नियम, 2021 के तहत निर्धारित परिस्थितियों में बिजली आपूर्ति संबंधी घटनाओं से हुए नुकसान के लिए नुकसान की भरपाई का प्रावधान है। उनके अनुसार, संबंधित नियमों में घटना की रिपोर्ट के अधिकतम 45 दिनों के भीतर नुकसान की भरपाई करने का प्रावधान लागू होता है, लेकिन पीड़ित को अब तक कोई भुगतान नहीं मिला है। अन्य उपभोक्ताओं के मुआवजे पर भी सवाल इस मामले ने उन अन्य उपभोक्ताओं की चिंता भी बढ़ा दी है, जिनके बिजली उपकरण कथित तौर पर इसी घटना में नष्ट हुए थे और उनकी शिकायत KEDL के पास पेंडिंग है। फिलहाल, मामले में दोनों कंपनियों की ओर से जिम्मेदारी से संबंधित आपत्तियां अदालत के समक्ष हैं। इस मामले में अगली सुनवाई 13 नवंबर को होगी।