कोटा मेडिकल कॉलेज से जुड़े हॉस्पिटल में प्रसूताऑ की मौत व किडनी फेल्योर के करीब 5 महीने पुराने मामले में निलंबित तीन डॉक्टरों को राहत मिली है। मामले में जांच कमेटियों ने डॉक्टर्स की लापरवाही नहीं माना है। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने तीनों निलंबित डॉक्टर को तुरंत बहाल किया है। मेडिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट की संयुक्त शासन सचिव डॉ. ज्योति चौहान ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। बता दें मई महीने में प्रसुताओं की तबीयत बिगड़ने व किडनी फेल्योर के मामले सामने आए थे। कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज और जेके लोन हॉस्पिटल में एक के बाद एक पांच प्रसूताओं की मौत और किडनी फेल्योर की घटना से हड़कम्प मच गया था। 13 दिन में 5 प्रसूताओं की मौत हो गई थी। प्रसूताओं की मौतों पर तुरंत एक्शन लगातार मौत के मामले सामने आने के बाद विभाग ने तुरंत एक्शन लिया, जिसके तहत 9 मई को मेडिकल कॉलेज डॉ.नवनीत कुमार (सहआचार्य जनरल सर्जरी विभाग) व 12 मई को डॉ. बद्री लाल (आचार्य स्त्री एंव प्रसूति रोग विभाग और डॉ. खुशबू मीना (सह आचार्य स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग) को निलंबित किया था। मामले की जांच के लिए हाई लेवल जांच कमेटी गठित की थी। अब 5 महीने बाद डॉ.नवनीत कुमार,डॉ. बद्री लाल, डॉ. खुशबू मीना को क्लीन चिट मिली है। तीनों को बहाल किया है। डॉक्टर जांच में नहीं मिले दोषी आदेश में बताया की मामला सामने आने के बाद 4 अलग-अलग कमेटी ने पूरे मामले की हड़ताल की। प्रकरण में चारों समितियां द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्ट में तीनों डॉक्टर शिक्षकों को किसी भी प्रकार से दोषी नहीं माना गया है। तीनों टीचर डॉक्टर को निलंबन से बहाल किया जाकर इनका पदस्थापन मेडिकल कॉलेज कोटा में तुरंत प्रभाव से किया जाता है। ---------------- ये खबर भी पढ़िए… भास्कर एक्सक्लूसिव कोटा मेडिकल कॉलेज में हुई हर मौत की वजह अलग:सिजेरियन डिलीवरी के बाद 5 महिलाओं की जान गई थी, जांच रिपोर्ट आई