भारत जनगणना 2027 के जाति कॉलम में यादव समाज के उपनामों के बजाय केवल 'यादव' नाम दर्ज करने की मांग की गई है। इसे लेकर यादव महासभा ने मंगलवार को कोटपूतली-बहरोड़ जिला कलेक्टर अपर्णा गुप्ता को एक ज्ञापन सौंपा। यादव महासभा जिला कोटपूतली-बहरोड़ के अध्यक्ष रामनिवास गिरदावर के नेतृत्व में यह ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। महासभा के प्रवक्ता डॉ. रामकरण यादव अवार्डी ने बताया कि ज्ञापन में भारत जनगणना आयुक्त और रजिस्ट्रार से अनुरोध किया गया है कि जाति जनगणना के दौरान यादव समाज के लगभग 57 उपनामों की जगह केवल 'यादव' ही दर्ज किया जाए। ज्ञापन सौंपने के दौरान जिले के विभिन्न तहसील अध्यक्षों सहित कई प्रमुख व्यक्ति उपस्थित रहे। इनमें भैंरूराम पावटा, रामजीलाल विराटनगर, लीलाराम बानसूर, रामावतार कोटपूतली, सुलतान नारायणपुर, संदीप माजरी, अमीलाल नीमराना शामिल थे। इसके अलावा, रामनिवास तहसीलदार, राजेंद्र ऑडिटर, गिरधारी गुरुजी, थानवीर यादव, प्रोफेसर सुरेश वार्डन, अजय बानसूर, फूलचंद नेता, किशनलाल, जगदीश सरपंच, अमरनाथ, अमीलाल एडवोकेट, लालाराम कोषाध्यक्ष, बाबूलाल थानेदार, डॉ. ओमप्रकाश ठुकराण और रमेश सहित अनेक लोग मौजूद थे। इसी के साथ, एक अन्य ज्ञापन में भारत जनगणना 2027 की अधिसूचना के कॉलम संख्या 10 में 'अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/जाति' के साथ 'अन्य पिछड़ा वर्ग' (ओबीसी) का बिंदु भी जोड़ने की मांग की गई है। महासभा का तर्क है कि जब ओबीसी आयोग गठित है, तो ओबीसी जातियों के आंकड़ों के बिना आयोग का गठन महत्वहीन हो जाता है। ये मांग ओबीसी वर्ग के साथ न्याय, समतामूलक सिद्धांत और पूर्ण पारदर्शिता के लिए आवश्यक बताई गई।