जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर के कुलगुरु प्रो. पवन कुमार शर्मा ने जसोल स्थित श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान में दर्शन किए। उन्होंने श्री राणीसा भटियाणीसा, श्री बायोसा, श्री सवाई सिंह जी, श्री लाल बन्ना सा, श्री खेतलाजी और श्री काला-गौरा भैरूजी के दर्शन कर प्रदेश की खुशहाली की कामना की। दर्शन के बाद कुलगुरु प्रो. शर्मा ने मंदिर संस्थान के प्रवक्ता हरिशचंद्र सिंह जसोल से मुलाकात की। इस दौरान पश्चिमी राजस्थान, विशेषकर मालाणी क्षेत्र के इतिहास, सांस्कृतिक विरासत, लोकपरंपराओं और सामाजिक समरसता से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। राठौड़ वंश के इतिहास और मालाणी की विरासत पर मंथन बैठक में राठौड़ वंश के प्राचीन राष्ट्रकूट इतिहास, दक्षिण भारत से कन्नौज और फिर पश्चिमी राजस्थान तक की ऐतिहासिक यात्रा पर विचार साझा किए गए। चर्चा में रावल मल्लीनाथ के योगदान और मालाणी क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी बात हुई। इस दौरान श्री राणी रूपादे जी के जीवन दर्शन, आध्यात्मिक चिंतन और भक्ति परंपरा पर विशेष चर्चा की गई। उनके सामाजिक समानता, मानवीय एकता और सद्भाव के संदेश की वर्तमान समय में प्रासंगिकता पर भी विचार रखे गए। ऐतिहासिक दस्तावेजों के संरक्षण और शोध पर जोर चर्चा के दौरान मालाणी क्षेत्र की ऐतिहासिक वंशावलियों, प्राचीन अभिलेखों, लोकसाहित्य, संत परंपराओं और ऐतिहासिक स्थलों के प्रामाणिक अध्ययन एवं दस्तावेजीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया गया। साथ ही जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के माध्यम से क्षेत्र के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत पर व्यापक शोध की संभावनाओं पर विचार-विमर्श हुआ। संस्थान के प्रवक्ता कुँवर हरिशचंद्र सिंह जसोल ने कहा कि मालाणी क्षेत्र का इतिहास शौर्य, त्याग, लोकआस्था, भक्ति और सामाजिक समरसता की परंपराओं से जुड़ा है। रावल मल्लीनाथ का योगदान और राणी रूपादे के समानता, सद्भाव एवं मानव कल्याण के आदर्श क्षेत्र की अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि इस विरासत का प्रामाणिक अध्ययन, संरक्षण और दस्तावेजीकरण कर भावी पीढ़ियों तक पहुंचाना जरूरी है। विश्वविद्यालय और संबंधित संस्थाओं के समन्वय से इस दिशा में सार्थक प्रयास किए जा सकते हैं। कुलगुरु को तस्वीर और इतिहास की पुस्तक भेंट की इस अवसर पर श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान की ओर से कुलगुरु प्रो. पवन कुमार शर्मा को श्री रावल मल्लीनाथ जी की तस्वीर और ‘महेचा राठौड़ों का इतिहास’ पुस्तक भेंट कर सम्मानित किया गया। इस पहल के माध्यम से संस्थान ने मालाणी क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के अध्ययन, संरक्षण तथा प्रचार-प्रसार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।