सरकारी योजनाओं में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए अब झालावाड़ पुलिस का ‘ऑपरेशन शटर डाउन’ प्रदेश के दूसरे विभागों और योजनाओं के लिए भी कार्रवाई का आधार बनेगा। गुरुवार को शासन सचिवालय में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की मौजूदगी में हुई उच्चस्तरीय बैठक में ऑपरेशन शटर डाउन को केंद्र में रखकर सरकारी योजनाओं में साइबर फ्रॉड के तौर-तरीकों, सिस्टम की खामियों और इन्हें रोकने के उपायों पर चर्चा हुई। इस दौरान झालावाड़ एसपी अमित कुमार बुड़ानिया ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ऑपरेशन शटर डाउन के निष्कर्ष और जांच के दौरान सामने आए आरोपियों के तौर-तरीके बताए। साथ ही सरकारी योजनाओं में मिली सिस्टम की खामियों और संबंधित विभागों के साथ मिलकर फर्जीवाड़ा रोकने के उपायों पर भी चर्चा हुई। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने भी झालावाड़ एसपी के प्रजेंटेशन की सराहना करते हुए डीबीटी में साइबर अपराध से मुकाबले के प्रयासों को उल्लेखनीय बताया है। एसपी अमित कुमार ने बताया कि ऑपरेशन शटर डाउन की जांच में अब तक 51 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। साथ ही आरोपियों से 53 लाख रुपए नकद, 16 कारें, 17 दोपहिया वाहन, 2 ट्रैक्टर, 35 लैपटॉप/कंप्यूटर, 72 मोबाइल और 198 सिम कार्ड सहित बड़ी मात्रा में बैंक दस्तावेज व रिकॉर्ड जब्त किए गए थे। झालावाड़ पुलिस के ऑपरेशन से खुला दूसरे राज्यों तक नेटवर्क: ऑपरेशन शटर डाउन में जब झालावाड़ पुलिस ने कड़ी से कड़ी जोड़ी तो सामने आया कि इस अंतरराज्यीय गिरोह का नेटवर्क झालावाड़ के अलावा दौसा, जोधपुर, जयपुर समेत पंजाब, मध्यप्रदेश और दिल्ली तक फैला हुआ था। अलग-अलग राज्यों से आरोपियों की गिरफ्तारियां होने से गिरोह के दूसरे राज्यों में भी नेटवर्क होने के संकेत मिले। ये योजनाएं थीं ठगों के निशाने पर ऑपरेशन शटर डाउन की जांच में सामने आया कि गिरोह प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, सामाजिक सुरक्षा पेंशन के तहत दिव्यांग पेंशन व मुफ्त स्कूटी वितरण योजना के अलावा फसल खराबा मुआवजे की आपदा प्रबंधन सूचना प्रणाली में संगठित गिरोह के रूप में धोखाधड़ी कर सरकारी राशि का दुरुपयोग कर रहे थे। अब सरकार का मानना है कि सरकारी योजनाओं में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का खुलासा ऑपरेशन शटर डाउन के दौरान हुआ। ऐसे में अब अन्य योजनाओं में भी इसकी उपयोगिता पर विचार किया जाए।