नागौर में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोपियों ने दूसरे लोगों की जमीन पर फर्जी बंटाईदार बनकर अपने नाम से फसल बीमा करवा लिया। इसके लिए असली खातेदारों के फर्जी हस्ताक्षर और कूटरचित दस्तावेज तैयार किए गए। मामले में नागौर पुलिस ने ई-मित्र संचालक समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई फसल बीमा प्रकरणों की जांच के लिए गठित एसआईटी और डीएसटी की संयुक्त टीम ने की। पुलिस के अनुसार, आरोपी फसल खराब होने की स्थिति में बीमा क्लेम की राशि खुद हासिल करने की तैयारी में थे। मामला जायल थाना क्षेत्र के तेजासर गांव का है। ई-मित्र पर बीमा करवाने पहुंचे तो सामने आया फर्जीवाड़ा तेजासर निवासी मेघाराम ने 22 अगस्त को पुलिस थाने में रिपोर्ट दी थी। उन्होंने बताया कि परिवार और अन्य खातेदारों की जमीन पर उनकी जानकारी के बिना किसी व्यक्ति ने फर्जी बंटाईदार अनुबंध तैयार कर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना खरीफ-2026 में अपने नाम से बीमा करवा लिया। मेघाराम के अनुसार, 20 अगस्त को जब वे अपनी जमीन का फसल बीमा करवाने ई-मित्र पर पहुंचे तो पता चला कि उनकी जमीन का बीमा पहले ही हो चुका है। इसके बाद दस्तावेजों की जांच की गई, जिसमें फर्जीवाड़े का पता चला। 100 रुपए के स्टाम्प पर बनाया पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने असली खातेदारों की जानकारी के बिना 100 रुपए के स्टाम्प पर फर्जी बंटाईदार अनुबंध तैयार किया। आरोप है कि इन दस्तावेजों पर खातेदारों के फर्जी हस्ताक्षर किए गए। इसके बाद आधार कार्ड, बैंक पासबुक समेत अन्य दस्तावेज लगाकर बीमा पॉलिसी के लिए आवेदन किया गया। जांच में पुलिस को पता चला कि ई-मित्र संचालक सुरेन्द्र कुड़ी ने रामप्रकाश, देवराज और अन्य लोगों के सहयोग से सीएससी आईडी के जरिए संबंधित बीमा कंपनी में दस्तावेज अपलोड किए थे। रिकॉर्ड मिलने के बाद आरोपियों तक पहुंची पुलिस पुलिस ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से संबंधित बीमा रिकॉर्ड हासिल किए। रिकॉर्ड की जांच और अनुसंधान के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने तीन आरोपियों की भूमिका सामने आने का दावा किया। इसके बाद सुरेन्द्र कुड़ी (30), रामप्रकाश (24) और देवराज (28) को गिरफ्तार कर लिया गया। सुरेन्द्र कुड़ी गोठ निवासी, रामप्रकाश सिलारिया निवासी और हाल मानासर तथा देवराज अडसिंगा निवासी है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। अब पुलिस मामले में शामिल अन्य लोगों और इसी तरीके से किए गए दूसरे फर्जी बीमा आवेदनों की भी जांच कर रही है।