नागौर में दरगाह हजरत सूफी हमीदुद्दीन नागौरी रहमतुल्लाह अलैह का 775वां सालाना उर्स परंपरागत रस्मों और अकीदत के साथ मनाया जा रहा है। उर्स के तहत दरगाह में गुस्ल की पाक रस्म अदा की गई। शाम को संदल पेश किया गया और महफिल-ए-समा में सूफियाना कलाम गूंजे। बड़ी संख्या में पहुंचे अकीदतमंदों ने दरगाह में हाजिरी लगाकर अमन-चैन की दुआ मांगी और अपनी मन्नतें मांगीं। उर्स के दौरान दरगाह बड़े पीर साहब के सज्जादानशीन पीर सदाकत अली जिलानी और गद्दीनशीन सैयद सैफुद्दीन जिलानी की ओर से चादर और अकीदत के फूल पेश किए गए। देशभर से आए जायरीनों ने दरगाह में हाजिरी लगाकर दुआएं मांगीं। देशभर से नागौर पहुंच रहे जायरीन दरगाह कमेटी के सदर हाजी शमशेर खान ने बताया कि गुस्ल की रस्म सदियों पुरानी रूहानी परंपरा का प्रतीक है। 775वें उर्स में शामिल होने के लिए देशभर से जायरीन नागौर पहुंच रहे हैं। जायरीनों की बढ़ती संख्या को देखते हुए दरगाह वक्फ कमेटी के पदाधिकारी और सदस्य व्यवस्थाओं में जुटे हैं। उर्स में आने वाले जायरीनों की सुविधा के लिए विशेष ध्यान दिया जा रहा है। झंडे की रस्म के साथ हुआ था उर्स का आगाज दरगाह हजरत सूफी हमीदुद्दीन नागौरी (रह.) के 775वें सालाना उर्स की शुरुआत शनिवार को परंपरागत झंडे की रस्म के साथ हुई थी। दरगाह के बुलंद दरवाजे पर झंडा फहराया गया। इसके बाद दरगाह परिसर के बुलंद दरवाजे स्थित ग्रीन हाउस में अजमत-ए-सूफी कॉन्फ्रेंस आयोजित हुई। कॉन्फ्रेंस में मुंबई, जोधपुर, बीकानेर, बासनी और नागौर सहित विभिन्न स्थानों से आए उलमा-ए-किराम, मशायख और इस्लामी विद्वानों ने हिस्सा लिया। वक्ताओं ने सूफी संतों की शिक्षाओं पर प्रकाश डालते हुए मोहब्बत, भाईचारे और अमन-शांति का संदेश दिया।