प्रदेश में नगर निकायों की तस्वीर शुक्रवार को पूरी तरह साफ हो गई। आखिरी तीन निगमों के आए परिणाम में भाजपा ने जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगम भी जीत ली। अब 10 में से 9 नगर निगम में भाजपा और सिर्फ बीकानेर में कांग्रेस का मेयर होगा। जयपुर में भाजपा उम्मीदवार सुनील कोठारी (पार्षद 112) ने कांग्रेस की सुनीता महावर (वार्ड 118) को 29 वोटों से हरा दिया। एक नोटा के खाते में गया। गौरतलब है कि 7 नगर निगम में मेयर के चुनाव 21 सितंबर को ही हो चुके हैं, जबकि जयपुर, जोधपुर और कोटा में मेयर चुनाव 25 सितंबर को कराए गए। इन तीन निगमों में 4 वार्डों में तकनीकी समस्या के चलते 16 सितंबर को वोटिंग कराई गई थी। इससे पहले अजमेर. पाली, अलवर, उदयपुर, भीलवाड़ा और भरतपुर में भाजपा अपना बोर्ड बना चुकी है। भीलवड़ा और भरतपुर में पार्टी प्रत्याशी निर्विरोध चुने गए थे। हालांकि कांग्रेस के हाथ सिर्फ बीकानेर ही मिला। वोट में सिर्फ 0.94% का फासला, 563 वार्ड अधिक जीते कांग्रेस का वोट बैंक पर असर?
कांग्रेस को भाजपा से करीब 0.94% कम वोट मिले, लेकिन भाजपा ने 4,179 और कांग्रेस ने 3,613 वार्ड जीते। 309 निकायों में भाजपा को 35.18% वोट (37.35 लाख) मिले, जबकि कांग्रेस को 34.24% (36.36 लाख)। प्रत्याशियों को सामूहिक रूप से 27.38% वोट मिले। वोटों मामूली अंतर बड़ा अंतर बना।
जीत में भाजपा को कांग्रेस से करीब 563 वार्ड ज्यादा मिले। साथ ही आरएलपी को 63, AAP को 42, सीपीआईएम को 38, बसपा को 19 और बीएपी को 8 वार्ड मिले। 10 निगमों की तस्वीर कैसे बदली?
10 निगमों में भाजपा ने 9 मेयर पद हासिल किए, जबकि कांग्रेस को बीकानेर में एक मेयर पद मिला। अजमेर में कांग्रेस 37 पार्षदों के साथ सबसे बड़ी पार्टी थी, लेकिन भाजपा की अनामिका शर्मा मेयर बनीं। पाली में कांग्रेस के 29 पार्षद थे, फिर भी भाजपा की नमिता बुबकिया मेयर बन गईं। जोधपुर में भाजपा 45 और कांग्रेस 44 पर थी, मेयर चुनाव में भाजपा के प्रसन्न को 53 और कांग्रेस के राजेंद्र को 47 वोट मिले। चुनाव का सबसे बड़ा फैक्टर?
दोनों स्तरों पर तस्वीर अलग रही। वार्ड चुनाव में 2,273 निर्दलीय जीतकर आए, जो कुल वार्डों का बड़ा हिस्सा है। भरतपुर में तो 65 में से 36 वार्ड निर्दलीयों ने जीते, जबकि भाजपा के 20 और कांग्रेस के सिर्फ 7 पार्षद थे; इसके बावजूद भाजपा की अनुराधा सिंह निर्विरोध मेयर बनीं। जोधपुर में भी 10 निर्दलीय और एक RLP पार्षद थे, इसलिए मेयर चुनाव में ये वोट महत्वपूर्ण रहे। दूसरी ओर कोटा में भाजपा के 57 मूल पार्षदों के मुकाबले उसकी मेयर प्रत्याशी को 65 वोट मिले और कांग्रेस प्रत्याशी को 35; उपलब्ध रिपोर्टों में इसे कांग्रेस के चार पार्षदों की क्रॉस-वोटिंग के रूप में बताया गया है। निर्दलीयों से दोनों दलों को नुकसान?
निर्दलीयों ने 2,273 वार्ड जीते और उन्हें 27.38% वोट मिले। भरतपुर, पाली, अजमेर, अलवर और जोधपुर जैसे निकायों में उन्होंने बोर्ड और मेयर के चुनाव का गणित प्रभावित किया। स्थानीय स्तर पर दोनों पार्टियों के सामने टिकट, बगावत और स्थानीय नेतृत्व की चुनौती बनी रहेगी। खाटूश्याम जी नगर पालिका का परिणाम हाई कोर्ट के आदेश पर रोका खाटूश्याम जी नगर पालिका के अध्यक्ष का चुनाव परिणाम फिलहाल रुका हुआ है। एक पार्षद के वोट देने नहीं पहुंचने के कारण यह परिणाम रुका है। चूंकि दोनों दलों के पास बराबर पार्षद हैं। ऐसे में एक पार्षद के वोट देने तक यहां की स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकती। कोर्ट ने फिलहाल इसके चुनाव पर रोक लगा रखी है। सुकेत में भाजपा का बोर्ड, एक वोट से जीत सुकेत नगर पालिका में चेयरमैन पद के लिए हुए चुनाव में भाजपा का बोर्ड बन गया। निर्दलीय पार्षदों का साथ लेकर भाजपा ने जितेंद्र चौपड़ा को नगरपालिका अध्यक्ष निर्वाचित करा लिया। सुकेत के ग्राम पंचायत से नगरपालिका बनने के बाद पहले चुनाव में भाजपा का बोर्ड बना है। भाजपा के चौपड़ा को 13 और कांग्रेस के प्रत्याशी उमरदीन खान को 12 पार्षदों के वोट मिले।