पाली के नवलखा मंदिर स्थित आराधना भवन में आयोजित ‘त्रिशतावधान’ महाप्रयोग के दौरान साध्वी नम्रयशाश्री ने अपनी स्मरणशक्ति और साधना का प्रदर्शन किया। इस आयोजन को देखने के लिए पंडाल जैन समाज के श्रद्धालुओं और शहरवासियों से भरा रहा। 300 अलग-अलग शब्द बोले महाप्रयोग के दौरान पंडाल में मौजूद श्रद्धालुओं में से एक-एक कर लोगों ने अपनी इच्छा से अलग-अलग शब्द बोले। किसी ने ‘बेंच’, ‘मोबाइल’, ‘क्रेडिट कार्ड’ और ‘500 का नोट’ जैसे शब्द कहे तो किसी ने ‘बेल्ट’, ‘अंगूठी’ और ‘कड़ा’ जैसे शब्द बताए। वहीं श्रद्धालुओं ने ‘शिवा देवी’, ‘नाभिराजा’, ‘सिद्धार्थ’, ‘चिंतामणि’, ‘घंटाकर्ण’ और ‘यंत्र’ जैसे धार्मिक नाम भी बोले। इसके अलावा ‘बेंगलुरु’ और ‘महाराष्ट्र’ जैसे स्थानों के नाम भी शामिल किए गए। इस तरह श्रद्धालुओं की ओर से 300 अलग-अलग और विविध शब्द बोले गए। मंच के पास लगे बोर्ड पर इन सभी शब्दों को उसी क्रम में लिखा जाता रहा। 300 शब्द पूरे होने के बाद पंडाल में गहरी खामोशी छा गई। साध्वी नम्रयशाश्री ने आंखें बंद कर मां सरस्वती का ध्यान किया और बिना किसी डायरी, स्क्रीन या इलेक्ट्रॉनिक उपकरण की सहायता के एक बार सुने गए सभी 300 शब्दों को उसी क्रम में दोहराकर सुना दिया। सटीक उत्तर दिए इसके बाद पंडाल में मौजूद प्रबुद्धजनों ने रैंडम क्रम से शब्द पूछे। 46वें, 137वें और 258वें स्थान पर बोले गए शब्दों के बारे में पूछे जाने पर साध्वीजी ने तत्काल सटीक उत्तर दिए। उनकी इस अद्भुत स्मरण शक्ति और साधना को देखकर श्रद्धालु चकित हो गए।