प्रदेश में पंचायतीराज चुनावों की घोषणा शनिवार को होने जा रही है। चुनाव चार फेज में होंगे। सरपंच और वार्ड पंचों के चुनाव बैलेट से होंगे, जबकि पंचायत समिति और जिला परिषद मेंबर के चुनाव ईवीएम से होंगे। पंचायतीराज चुनावों में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण है। आयोग के चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही ग्रामीण इलाकों में आचार संहिता लग जाएगी। करीब दो महीने तक आचार संहिता लागू रह सकती है। साथ ही तबादलों पर पाबंदी लग जाएगी। इन चुनावों में 1.69 लाख नए पंचायतीराज जनप्रतिनिधि चुने जाएंगे। 1403 जिला परिषद मेंबर और 8245 पंचायत समिति मेंबर चुने जाएंगे। ये मिलकर 41 जिला प्रमुख और 457 पंचायत समितियों में प्रधान चुनेंगे। 14403 ग्राम पंचायतों में सरपंच, उपसरपंच और 1.30 लाख वार्ड पंचों के चुनाव होंगे। उधर, आचार संहिता लागू होने से एक दिन पहले ही प्रदेशभर में 11 हजार जगहों पर ग्राम सभाएं हुईं। इनमें भविष्य के कामकाज और बजट तय करने सहित कई बिंदुओं पर चर्चा हुई। भास्कर इनसाइट दलों की कड़ी परीक्षा; निर्दल का बल महत्वपूर्ण होगा निकाय चुनाव की तरह ही बीजेपी के सामने पंचायत समितियों और जिला परिषदों में ज्यादा वार्ड जीतना भी बड़ी चुनौती है। गांवों में आम तौर पर कांग्रेस मजबूती से लड़ती आई है। इसलिए इसे चुनौती माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि निर्दलीय, आरएलपी, बीएपी, बसपा सहित अन्य पार्टियां इस चुनाव में अच्छा स्कोर कर सकती हैं, जो कई जगह निर्णायक भूमिका में रह सकती हैं। जिला परिषदों और पंचायत समितियों में कौन ज्यादा वार्ड जीतता है, उससे असली परसेप्शन बनेगा। जिला परिषद मेंबर मिलकर जिला प्रमुख और पंचायत समिति मेंबर मिलकर प्रधान का चुनाव करेंगे। निकाय की तरह पंचायतीराज चुनावों में भी दलबदल विरोधी कानून लागू नहीं होता, इसलिए प्रधान और जिला प्रमुख बनाने में खूब सियासी जोड़-तोड़ चलना लाजमी है। जिस पार्टी के जितने ज्यादा जिला परिषद मेंबर और पंचायत समिति मेंबर जीतेंगे, उससे ही जनमत का रुझान तय हो जाएगा। गौरतलब है कि यह प्रदेश का सबसे बड़ा चुनाव इसलिए है क्योंकि इसमें सवा चार करोड़ वोटर शामिल होंगे। आचार संहिता से पहले सरकार ने गांवों पर फोकस बढ़ाया प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायतीराज चुनाव की आचार संहिता लागू होने से ठीक पहले राज्य सरकार ने ग्रामीण मतदाताओं को साधने और धरातल पर लचर प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। पंचायतीराज मंत्री मदन दिलावर ने अफसरों के साथ अलग-अलग बैठकें ली हैं। उनका यह कदम चुनाव से पहले ग्रामीण वोटर्स की नाराजगी दूर करने और विपक्ष के हाथ से बड़े मुद्दे छीनने की एक बड़ी सियासी व्यूहरचना है।