प्रदेश में निकाय चुनावों के लिए भाजपा प्रत्याशी चयन की कवायद अंतिम दौर में पहुंच गई है। निकायों से तैयार किए गए पैनल बुधवार से प्रदेश भाजपा मुख्यालय पहुंचने शुरू हो गए है। अब गुरुवार से प्रदेश स्तर पर इन नामों की छंटनी और समीक्षा होगी। पहले दिन गुरुवार को अजमेर, बीकानेर व उदयपुर संभाग के निकायों में टिकट मांगने वाले दावेदारों पर मंथन होगा। इसके बाद प्रदेश स्तरीय टिकट चयन समिति अंतिम निर्णय करेगी। पार्टी मुख्यालय से टिकटों की सूची जारी करने का क्रम पैनल पहुंचने के करीब दो दिन बाद शुरू होने की संभावना है। प्रदेश के सभी 309 निकायों में भाजपा के सिंबल से चुनाव लड़ने के लिए अब तक 5 हजार लोगों ने दावेदारी जताई है। निकाय चुनाव में भाजपा के टिकट के लिए दावेदारों की लंबी कतार ने पार्टी के सामने टिकट चयन की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। संभाग स्तर पर टिकटों पर मंथन प्रदेश कार्यालय में 27, 28 व 29 अगस्त को संभाग स्तर पर टिकट दावेदारों के नाम पर मंथन होगा। यह मंथन विधानसभा वार किया जाएगा। मंथन के दौरान विधायक, विधायक प्रत्याशी, जिला अध्यक्ष, जिला प्रभारी, संभाग प्रभारी व पर्यवेक्षक मौजूद रहेंगे। प्रदेश अध्यक्ष व संगठन महामंत्री पार्टी टीम के साथ दावेदारों के नामों पर चर्चा करेंगे। जयपुर व जोधपुर संभाग के नामों पर अंतिम दिन चर्चा होगी। टिकट वितरण के साथ ही सामने आएंगे मेयर व सभापति के चेहरे : नगर निगम में मेयर और नगर पालिका-नगर परिषद में सभापति के नामों को लेकर लोगों में उत्सुकता है। पार्टी की ओर से वरिष्ठ नेताओं के चेहरों पर दांव लगाने की संभावना है। लेकिन, टिकट वितरण के साथ ही मेयर व सभापति के चेहरे सामने आएंगे। स्थानीय स्तर पर बनी पहली सूची निकाय स्तर पर मिले आवेदनों और स्थानीय समीकरणों को देखते हुए पैनल तैयार किए गए हैं। इनमें स्थानीय संगठन की राय, दावेदार की सक्रियता, चुनावी स्थिति और क्षेत्रीय समीकरण जैसे पहलुओं को आधार बनाया गया है। अब इन पैनलों की प्रदेश स्तर पर समीक्षा होगी। यहां से नामों पर अंतिम मुहर लगने के बाद संबंधित निकायों के प्रत्याशियों की घोषणा की जाएगी। 50 हजार आवेदनों में से चुनेंगे प्रत्याशी पार्टी के विभिन्न स्तरों पर अब तक 50 हजार आवेदन आए है। एक ही वार्ड में पार्षद व निगम में मेयर पद के लिए कई दावेदार होने की स्थिति में पार्टी नेतृत्व को स्थानीय गुटबाजी और दावेदारों के बीच संतुलन साधते हुए नाम तय करने होंगे ऐसे में प्रदेश स्तर पर होने वाली चयन प्रक्रिया को बेहद अहम माना जा रहा है। संतान नियम में शिथिलता से बढ़े दावेदार: भाजपा में इस बार टिकट के लिए दावेदारों की संख्या बढ़ने के पीछे केंद्र व राज्य में पार्टी की सरकार और संतान संबंधी नियमों में दी गई शिथिलता को वजह मान रहे हैं। पहले संतान नियमों की वजह से कई कार्यकर्ता दावेदारी नहीं कर पाते थे।