पोकरण में पहले ड्रोनथॉन-2026 का आगाज: स्वदेशी ‘वायु उत्तम’ ने सैन्य और नागरिक ड्रोन्स की लोकेशन लाइव ट्रैक की जैसलमेर के पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में सोमवार को भारतीय वायु सेना के पहले ‘ड्रोनथॉन-2026’ का आगाज हुआ। तीन दिवसीय आयोजन का उद्घाटन वायु सेना के उप प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने किया। पहले ही दिन अत्याधुनिक स्वदेशी तकनीकों का प्रदर्शन हुआ। इनमें सबसे खास वायु सेना की स्वदेशी ट्रैफिक मैनेजमेंट प्रणाली ‘वायु उत्तम’ का लाइव परीक्षण रहा। इस सिस्टम ने आसमान में उड़ रहे सैन्य और नागरिक ड्रोन्स को तुरंत खोजकर उनकी सटीक लोकेशन ट्रैक की। ड्रोन्स की टक्कर रोकने और संदिग्ध उड़ान पहचानने में मददगार ‘वायु उत्तम’ को भविष्य में बढ़ने वाले ड्रोन ट्रैफिक को व्यवस्थित करने के लिए विकसित किया गया है। यह सिस्टम भीड़भाड़ वाले एयरस्पेस में ड्रोन्स को आपस में टकराने से रोकने में मदद करेगा। साथ ही बिना अनुमति उड़ने वाले या संदिग्ध ड्रोन्स की समय रहते पहचान कर सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट करने में भी उपयोगी होगा। 20 से ज्यादा कंपनियां और स्टार्टअप्स ले रहे हिस्सा ड्रोनथॉन में देशभर की 20 से अधिक अग्रणी रक्षा कंपनियां, स्टार्टअप्स, एमएसएमई और वैज्ञानिक व इनोवेटर्स हिस्सा ले रहे हैं। इनकी मदद से भारत के मानवरहित एविएशन इकोसिस्टम को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। आयोजन के दौरान वायु सेना ने ‘आईएएफ यूएएस रोडमैप’ भी जारी किया। इससे कंपनियों और स्टार्टअप्स को आने वाले समय में वायु सेना की जरूरतों के अनुसार ड्रोन और मानवरहित प्रणालियां विकसित करने की दिशा मिलेगी। ‘वायु उत्तम’ कैसे काम करता है? ‘वायु उत्तम’ भारतीय वायु सेना का स्वदेशी मल्टी-मोड मानवरहित यातायात प्रबंधन सिस्टम है। आसान भाषा में यह आसमान की ट्रैफिक पुलिस की तरह काम करता है। इसका उद्देश्य सैन्य, नागरिक और कमर्शियल ड्रोन्स की उड़ान को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाना है। पोकरण में हुए लाइव परीक्षण के दौरान सिस्टम ने सैन्य और नागरिक दोनों तरह के ड्रोन्स को खोजकर उनकी लोकेशन ट्रैक की। हवाई सुरक्षा से लेकर संवेदनशील ठिकानों की निगरानी तक यह सिस्टम एयरस्पेस को सुरक्षित रखने के साथ सैन्य ठिकानों, हवाई अड्डों और वीआईपी इलाकों के आसपास अनधिकृत ड्रोन की पहचान में मदद करेगा। आने वाले समय में डिलीवरी, फोटोग्राफी, कृषि और सुरक्षा कार्यों में ड्रोन्स की संख्या बढ़ने की संभावना है। ऐसे में यह प्रणाली ड्रोन की तय सीमा और सुरक्षित रूट में उड़ान सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा सकती है। स्वदेशी तकनीक से विकसित होने के कारण ड्रोन ट्रैफिक मैनेजमेंट के क्षेत्र में विदेशी तकनीक पर निर्भरता भी कम होगी। पांच प्रमुख श्रेणियों में ड्रोन और तकनीकों का प्रदर्शन ड्रोनथॉन में प्रदर्शित मानवरहित प्रणालियों को मुख्य रूप से पांच श्रेणियों में रखा गया है। पहली श्रेणी निगरानी और सामरिक टोही की है। इसमें ऐसे ड्रोन शामिल हैं, जो दुश्मन के इलाके में जाकर लाइव जानकारी और तस्वीरें कमांडरों तक पहुंचाते हैं। दूसरी श्रेणी स्वायत्त संचालन और झुंड तकनीक की है, जिसमें कई ड्रोन एक साथ उड़कर किसी इलाके को घेरने या सामूहिक कार्रवाई करने में सक्षम होते हैं। तीसरी श्रेणी इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली की है। इसमें ऐसे ड्रोन शामिल हैं, जो दुश्मन के रडार और कम्युनिकेशन नेटवर्क को बाधित कर सकते हैं। चौथी श्रेणी मानवरहित विमान रोधी प्रणालियों की है, जिनका इस्तेमाल दुश्मन के ड्रोन को हवा में ही खोजकर नष्ट करने के लिए किया जाता है। पांचवीं श्रेणी में अन्य उन्नत मानवरहित प्रणालियों और तकनीकों का प्रदर्शन किया जा रहा है। रेगिस्तानी और युद्ध जैसे माहौल में हो रहा परीक्षण ड्रोनथॉन में इन प्रणालियों को कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, रेगिस्तानी आंधियों और युद्ध जैसे चुनौतीपूर्ण माहौल में परखा जा रहा है। वायु सेना का जोर केवल कागजी दावों पर नहीं, बल्कि ड्रोन्स की विश्वसनीयता, लंबी दूरी तक काम करने की क्षमता, त्वरित प्रतिक्रिया और लगातार संचालन की ताकत जांचने पर है। आयोजन को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
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इंडियन एयरफोर्स का पोकरण रेंज में 'ड्रोनाथन-2026':स्वदेशी ड्रोन तकनीक, हमलावर प्रणालियों और एंटी-ड्रोन तकनीक का शक्ति प्रदर्शन भारतीय वायुसेना (IAF) 14 से 16 सितंबर 2026 तक राजस्थान के जैसलमेर जिले स्थित पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में एक मेगा अभ्यास 'ड्रोनाथन-2026' का आयोजन करने जा रही है। पूरी खबर पढ़ें