पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने कहा- चाहे पक्ष आ जाए या विपक्ष आ जाए सही काम है तो उसे करना है और अगर गलत काम पार्टी का भी हो तो नहीं करना है। चाहे उसका परिणाम कुछ भी हो, उसमें घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने राजनीति को सांप-सीढ़ी का खेल बताते हुए कहा कि इसमें ऊपर नीचे चलता रहता है, ये जीवन का क्रम है। इसके कारण गलत रास्ते पर चलने से मन को पछतावा होगा। उन्होंने कहा कि जब आराम से नींद लेंगे तो सुखी हो और करवट बदलते-बदलते नींद आ रही है तो कुछ न कुछ गड़बड़ है। जोधपुर में मारवाड़ इंटरनेशनल सेंटर में सोमवार को आचार्य चिदानंद महाराज के 68वें जन्मोत्सव के तहत हुए कार्यक्रम में गुलाबचंद कटारिया ने ये बात कही। कार्यक्रम में जोधपुर मेयर प्रसन्नचंद मेहता का भी सम्मान किया गया। मेयर-पार्षद वार्ड का नहीं, पूरी जनता का होता है पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने जनप्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा- जब चुने हुए पद पर बैठ जाते हैं तो फिर पार्टी नहीं जनता रहती है। हम पार्षद हैं तो वार्ड की जनता के पार्षद हैं, किसी ने वोट दिया या नहीं। उन्होंने कहा- हम महापौर हैं तो पूरी जोधपुर की जनता के महापौर हैं चाहे किसी ने चुना या नहीं। हमारा नाम जोधपुर का महापौर होता है, बीजेपी का महापौर तो पार्टी कहती है। इन बातों को ध्यान में रखकर राजनीति करने का प्रयास करें। किसी चुनाव में मेरे घर का पैसा खर्च नहीं हुआ कटारिया ने कहा- राजनीति में आना आप लोगों के लिए कठिन है। जिस तरह से देश का वातावरण है, उसमें जिंदा रहना आसान नहीं है। जैसे राजनीति के कदम चल पड़े हैं, उसे सोचकर ये और भी कठिन होने वाला है। ऐसे समय में थोड़े बहुत जो हम राजनीति में हैं, हम अपने काम से अपने आप को इतना ऊपर उठाने का काम करें कि लोग हमारे नाम का उदाहरण दें और ईमानदारी के सबूत बन सकें। उन्होंने कहा- समाज में कई बार राजनीति में पैसा नहीं होगा तो राजनीति नहीं होगी। मैं ऐसा उदाहरण हूं जिसका एक रुपया राजनीति में घर से नहीं लगा है। किसी चुनाव में खर्च नहीं हुआ है। मैं 11 चुनाव लड़ चुका हूं, जिनमें से 9 चुनाव जीत चुका हूं, लेकिन, एक नया पैसा मेरे घर से नहीं लगा। जनता ने दिया और जनता के काम के लिए खर्च किया। मैं सोचता हूं उसके कारण से आज संतोष मिला है। हमारा काम अच्छा होता है, तो खुद को लगता है आज अच्छा किया। जोधपुर मेयर के लिए बोले- इस बार गाड़ी पार हो गई पंजाब के राज्यपाल ने कहा- प्रसन्नचंद मेहता मेरे साथ 35 साल से लगातार कदम से कदम मिलाकर काम कर रहे हैं, लेकिन इनके हाथ में रेखा नहीं है। कितनी बार प्रयास किया, लेकिन किनारे आकर गाड़ी अटक जाती थी। इस बार गाड़ी पार हो गई। इसलिए मुझे सबसे ज्यादा संतोष है कि एक समर्पित कार्यकर्ता का सम्मान हुआ है। कटारिया ने कहा- वास्तव में देव दर्शन और आदर्श को मानते हो तो ये रास्ता बहुत टेढ़ा है। इस रास्ते में कभी गिर सकते हैं और कभी भी दाग लग सकता है। ये रास्ता जिंदगी को अच्छा बनाने का भी है और नीचे गिराने का भी है। हम भगवान महावीर के अनुयायी है। हमारे जीवन के कुछ संस्कार हैं। हमारे जीवन में काम करने का तौर तरीका है। हम अगर वास्तव में समाज का मान बढ़ाना चाहते हैं तो अपने जीवन में सेवा धर्म को अपनाकर ईमानदारी से काम करना ये हमारा दायित्व और कर्तव्य है। हमारा दायित्व और कर्तव्य है कि जिस समाज में हम पैदा हुए हैं, उस समाज की प्रतिष्ठा राजनीति में बढ़ाना हमारा धर्म है। मैं सोचता हूं कि प्रभु हमको ये अवसर देता है तो हम इस अवसर का लाभ लेकर जनता का अशीर्वाद लेने का प्रयास करें। प्रभु कोई है तो वो केवल जनता है। मैंने गुरुओं से कभी पद की मांग नहीं की गुलाबचंद कटारिया ने कहा- मैं सामान्य परिवार से हूं। मेरे परिवार की राजनीतिक हस्ती भी नहीं थी। मुझे गांव में पूरा नाम लेकर कोई नहीं पुकारता था। फिर भी ईश्वरीय योग से इस रास्ते पर बढ़ा। जीवन में ठीक रास्ते पर चलते रहे, कोई दाग नहीं लगा। ये गुरु भगंवतों का आशीर्वाद हैं। मैं कभी भी गुरु भगवंतों के पास जाता हूं तो कभी ये नहीं मांगता कि मुझे कोई अच्छा पद मिले। मैंने कभी पद की मांग नहीं की। मैंने इतना जरूर कहा कि मुझे आशीर्वाद मिले कि मैं मेरा काम ईमानदारी और सेवक के तौर पर कर सकूं, ताकि मेरा और समाज का नाम भी राजनीति में बढ़ा सकूं। मन मुटाव होता है तो क्षमा मांग लेता हूं कटारिया ने अपने जीवन और जन्मदिन से जुड़ी बातें भी शेयर की। उन्होंने कहा- मैंने हमेशा अपना जन्मदिन संतों के चरणों में या फिर किसी तीर्थ स्थान से शुरू किया। जन्मदिन की पूर्व संध्या पर मुछाला महावीरजी सोया था और अगले दिन आशीर्वाद लेकर अपने नए साल की शुरुआत करता हूं। वास्तव में जन्मदिन पर क्या किया और क्या नहीं किया, अच्छा किया या गलती हुई उसे मैं जरूर सोचता हूं। अगर कोई कमी रही है तो उसे देखने की कोशिश करता हूं। जिनसे मन मुटाव हुआ, उनसे मैं क्षमा मांगता हूं।