राजस्थान में खेती को तकनीक आधारित और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए कृषि विभाग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन, रिमोट सेंसिंग और डिजिटल किसान आईडी के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रहा है। राज्य ने 90.19 लाख किसान आईडी बनाने का निर्धारित लक्ष्य शत-प्रतिशत हासिल कर लिया है। वहीं, जयपुर के पंत कृषि भवन में वाधवानी इंस्टीट्यूट की ओर से 13 जिलों के कृषि अधिकारियों को AI तकनीक का प्रशिक्षण दिया गया। इन पहलों से किसानों को मौसम, कीट-रोग, फसल उत्पादन अनुमान, सिंचाई, उर्वरक प्रबंधन और बाजार संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने के साथ फसल बीमा, उर्वरक वितरण और अन्य कृषि योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी। AI से खेती होगी स्मार्ट, किसानों को मिलेगी सटीक जानकारी कृषि विभाग किसानों तक तकनीक आधारित सेवाएं पहुंचाने और कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए नवाचार कर रहा है। AI तकनीक के माध्यम से मौसम के पूर्वानुमान, फसलों में कीट एवं रोगों की पहचान, उत्पादन अनुमान, सिंचाई और उर्वरक प्रबंधन तथा बाजार की जानकारी किसानों तक पहुंचाई जा सकती है। इससे कृषि संबंधी निर्णय लेने में सटीकता बढ़ेगी और संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा। विभाग का मानना है कि आधुनिक तकनीकों के प्रभावी इस्तेमाल से खेती की कार्यक्षमता बढ़ाने और किसानों की आय में सुधार की दिशा में मदद मिलेगी। ड्रोन और रिमोट सेंसिंग से फसल नुकसान का आकलन झालावाड़ के कृषि संयुक्त निदेशक डॉ. नरेश कुमार शर्मा ने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत रिमोट सेंसिंग और ड्रोन तकनीक के उपयोग से फसल क्षति का आकलन अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सकेगा। इसके साथ ही राज किसान पोर्टल को AI और डेटा आधारित तकनीकों से सक्षम किया जा रहा है, जिससे किसानों को कृषि सेवाएं उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को बेहतर बनाया जा सके। कृषि विभाग प्राकृतिक, जैविक और जलवायु अनुकूल खेती के साथ आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रसार पर भी काम कर रहा है। इसके लिए 38 संगठनों के साथ समझौते किए गए हैं। इनके माध्यम से किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और जल संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों में सहायता मिलेगी। एग्रीस्टैक आयुक्तालय से योजनाओं का होगा बेहतर एकीकरण राज्य में एग्रीस्टैक आयुक्तालय की स्थापना की जा रही है और कृषि आयुक्त को इसका आयुक्त नामित किया गया है। एग्रीस्टैक डेटा के पीआईआई के माध्यम से विभिन्न विभागीय कार्यक्रमों और योजनाओं को एकीकृत करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इससे भूमि क्षेत्रफल के आधार पर उर्वरक की आवश्यकता का आकलन करने, उर्वरकों का लक्षित वितरण सुनिश्चित करने और जरूरत के अनुसार संसाधन उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। इसके अलावा ड्रोन तकनीक के माध्यम से नैनो लिक्विड यूरिया वितरण में सही लाभार्थियों के चयन को भी बेहतर बनाया जा सकेगा। 90.19 लाख किसान आईडी का लक्ष्य शत-प्रतिशत पूरा राज्य सरकार की ओर से निर्धारित 90.19 लाख किसान आईडी बनाने का लक्ष्य राजस्थान ने शत-प्रतिशत हासिल कर लिया है। इस उपलब्धि के साथ राजस्थान निर्धारित किसान आईडी लक्ष्य पूरा करने वाला उत्तर भारत का पहला और देश का छठा राज्य बन गया है। कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने बताया कि राज्य में किसान आईडी को केवल पंजीकरण तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे विभिन्न कृषि व्यवस्थाओं और सरकारी योजनाओं से जोड़ने की दिशा में भी काम किया गया है। राज्य में किसान आईडी का अन्य डेटाबेस के साथ सिंक्रोनाइजेशन पूरा कर लिया गया है। इसे पीएम-किसान, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, उर्वरक वितरण प्रणाली और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद व्यवस्था के साथ एकीकृत किया गया है। इससे पात्र किसानों की पहचान करने और उन्हें विभिन्न योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अधिक सुगम एवं प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी। किसान आईडी से बार-बार दस्तावेज देने की जरूरत होगी कम डॉ. नरेश कुमार शर्मा ने बताया कि किसान आईडी के माध्यम से किसानों की प्रमाणित डिजिटल पहचान विकसित होगी। इससे भविष्य में विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने के लिए बार-बार समान दस्तावेज प्रस्तुत करने की आवश्यकता कम हो सकती है। साथ ही पात्र लाभार्थियों की पहचान तेजी से करने और सरकारी सेवाओं को अधिक लक्षित बनाने में मदद मिलेगी। किसान आईडी, भूमि रिकॉर्ड और क्रॉप रजिस्ट्री जैसी व्यवस्थाओं के आपसी एकीकरण से किसानों की वास्तविक भूमि एवं फसल संबंधी जानकारी के आधार पर योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने की क्षमता विकसित होगी। इससे फसल बीमा, उर्वरक वितरण, पीएम-किसान, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद और अन्य कृषि योजनाओं के क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। इन पहलों के जरिए राजस्थान में कृषि क्षेत्र को तकनीक-सक्षम, पारदर्शी और किसान-केंद्रित बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।