सीएम भजनलाल शर्मा ने कहा कि जब ढाई साल पहले हमारी सरकार आई तो हमें खंडहर राजस्थान मिला था। जैसे कोई पुराना खंडहर मकान होता है, जब उसको संभालने की जिम्मेदारी मिलती है तो पहले उसके चारों ओर चक्कर लगाते हैं। देखते है कि काम कहां से शुरू करें, यहां से टूटा, वहां से फूटा, यह स्थिति हो गई थी। भ्रष्टाचार का आलम था, युवा रो रहे थे, किसान की हालत खराब थी। हमने सबको बुलाया, चर्चा की, आखिरकार काम कहां से शुरू किया जाए। हमने सबसे पहले पानी और बिजली के क्षेत्र में काम करना शुरू किया। पानी को लेकर हमने चार अंतरराष्ट्रीय जल समझौते किए, जो सालों से अटके हुए थे। 26 जिलों में हम किसानों को दिन में बिजली दे रहे है। साल 2027 से प्रदेश के सभी किसानों को दिन में बिजली मिलेगी। सीएम भजनलाल शर्मा ने यह सारी बातें आज जयपुर में पंचायती राज जनप्रतिनिधियों से संवाद कार्यक्रम में कहीं। कांग्रेसियों के लिए मैथ का ट्यूशन भी लगवा दूंगा सीएम भजनलाल शर्मा ने कहा कि जब मैने 4 लाख सरकारी नौकरियां देने की बात कहीं थी, तो कांग्रेसियों ने कहा कि झूठ बोल रहे है, नहीं दे सकते हैं। ये क्या, कोई नहीं दे सकता हैं। मैने कहा था कि कोई की बात मत कीजिए। मैने कांग्रेस के लोगों को कल भी कहा था कि आप नोट करते जाइए, डायरी-पेन जेब में रखिए। अभी तक 1.94 लाख लोगों को नियुक्तियां दे चुके हैं। 1.22 लाख पदों के लिए परीक्षा हो चुकी हैं। 1.25 लाख नौकरियां प्रक्रियाधीन हैं। कांग्रेसियों से कह रहा हूं कि जोड़ लगा लीजिए। अब तो मैं उनसे कहने लग गया हूं कि अगर आपकी मैथेमेटिक्स कमजोर है तो मैथ का ट्यूशन भी लगवा दूंगा। आप बता दीजिए कि किस-किस को ट्यूशन लगवाना हैं। जिससे वो रोज उनको गुणा-भाग करके बता दे कि इतना हो गया हैं। आज भी मुझे सरपंच पहले कहते हैं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि पंचायतीराज और सरपंच विकास की धुरी हैं। गांव में सरपंच उम्मीद का पहला केन्द्र होता हैं। गांव में लोग सरपंच के पास अपनी छोटी-छोटी समस्या लेकर जाते है, लेकिन आप उसे छोटी समस्या मानकर इग्नोर मत कीजिए। सीएम ने कहा कि आज भी मुझे सरपंच पहले और मुख्यमंत्री बाद में कहते हैं। आप कुछ भी बन जाइए, लेकिन गांव के लिए आप सरपंच पहले हैं। उन्होने कहा कि एक बार मैं एक मंदिर में गया था। तब लोग वहां मुख्यमंत्री भजनलाल जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे और गांव वाले सरपंच भजनलाल जिंदाबाद कह रहे थे। उन्होंने कहा कि गांव को समझने के लिए गांव के लोगों के बीच बैठना पड़ता हैं। उन्होने पंचायतीराज के जनप्रतिनिधियों को गांव में ज्यादा समय देने और केन्द्र व राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ ज्यादा से ज्यादा ग्रामीणों को दिलाने के लिए कहा।