राजस्थान हाईकोर्ट ने एनडीपीएस मामले में कॉन्स्टेबल भैंरूलाल को राहत दी है। कोर्ट ने उसके खिलाफ धारा 8/29 के आरोप रद्द किए। जस्टिस फरजंद अली ने कहा- किसी आरोपी से सिर्फ संबंध या सामान्य सहयोग का आरोप आपराधिक साजिश का आधार नहीं बन सकता। यह मामला चित्तौड़गढ़ के चक्तिया गांव में फरवरी 2023 की नारकोटिक्स कार्रवाई से जुड़ा है। केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो ने रमेशवर और कालू समेत अन्य आरोपियों के ठिकानों से अफीम, डोडा पोस्त और कुछ टैबलेट बरामद किए थे। भैंरूलाल को सह-आरोपियों के बयानों पर जांच में शामिल किया गया। पुलिस के अनुसार- भैंरूलाल के पास से 68 हजार 500 रुपए नकद मिले थे, जो गिरफ्तार आरोपी को अधिकारियों से राहत दिलाने के लिए थे। हालांकि हाईकोर्ट ने पाया कि भैंरूलाल के मादक पदार्थ की खरीद, परिवहन या बिक्री में शामिल होने का कोई सबूत नहीं हैं। बयान को कबूलनामा नहीं माना जा सकता कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के तूफान सिंह फैसले का हवाला दिया कि एनडीपीएस एक्ट की धारा 67 के बयान को कबूलनामा नहीं माना जा सकता। जांच अधिकारी के मुताबिक- भैंरूलाल न तो बरामदगी स्थल पर था और न ही उसके पास से मादक पदार्थ मिला। हाईकोर्ट ने 6 दिसंबर 2023 का आरोप तय करने का आदेश रद्द कर भैंरूलाल को बरी किया।