'हम अपने परिवारों से दूर कमाने के लिए गए थे। हमने एजेंट पर भरोसा किया, परिवार से रुपए लिए। किसी ने ब्याज पर 50 हजार तक कर्ज लिया। अब दुबई पहुंचने के बाद हमें लग रहा है कि नौकरी के नाम पर हमारे साथ धोखा हुआ है। एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही सपने टूट गए। काम के नाम दूसरी सप्लाई कंपनी के हवाले कर दिया गया। हमारे पासपोर्ट ले लिए। सुबह 4 बजे ही उठा देते हैं। 16 घंटे तक काम करवाते हैं। भारत वापस भेजने के लिए एक व्यक्ति से 80 हजार रुपए मांगे जा रहे हैं। कंपनी ने कमरों से बाहर निकाल दिया। रहने-खाने की व्यवस्था नहीं है। हमने क्या बुरा किया था कि हमें ऐसी कंपनी में भेज दिया? अगर हमारे साथ कोई अनहोनी होती है तो इसके लिए एजेंट और संबंधित कंपनी जिम्मेदार होंगे। ये कहना है दुबई में फंसे शेखावाटी के युवाओं का… वीडियो जारी कर अपनी पीड़ा बताई है। चूरू-झुंझुनूं के 6 लोग 1 से 3 अक्टूबर के बीच दुबई पहुंचे थे। इनके साथ 26 व्यक्ति और है जो काफी समय से फंसे हैं। एक युवक रोते हुए बोला… मेरे से नहीं हो रहा है। चक्कर आते हैं। 50 मंजिल चढ़ना-उतरना पड़ता है। पढ़िए … दुबई में फंसे लोगों का दर्द एजेंट को 50 हजार दिए, दुबई पहुंचते ही पासपोर्ट भी चला गया झुंझुनूं के डाबड़ी धीरसिंह निवासी मेहबूब अली टाइल मेसन हैं। मेहबूब का कहना है कि मैंने झुंझुनूं के एजेंट सुरेश कुमार को 50 हजार रुपए दिए थे। एजेंट ने मुझे दुबई की MBM कंपनी में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया था। मेरा इंटरव्यू भी इसी कंपनी के लिए हुआ और वीजा भी इसी कंपनी का दिया गया। मेहबूब ने बताया- दुबई पहुंचने के बाद मुझे MBM के बजाय ABC कंपनी में ड्यूटी पर लगा दिया गया। यह सप्लाई कंपनी है। मुझे भारत में जिस कंपनी और काम के बारे में बताया गया था, यहां वैसा नहीं मिला। दुबई पहुंचते ही मेरा पासपोर्ट भी ले लिया गया। अब मेरे पास अपनी पहचान का कोई दस्तावेज नहीं है। मुझे बताया जा रहा है कि दो महीने बाद सैलरी मिलेगी। ऐसे में दो महीने तक खाने का इंतजाम कैसे करूं? परिवार से पैसे मांगकर आखिर कितने दिन गुजारा करूंगा? मेहबूब का कहना है - भारत वापस आने की बात करने पर मुझसे करीब 3 हजार दिरहम (80 हजार रुपए) मांगे जा रहे हैं। मैंने पहले ही दुबई आने में 50 हजार रुपए खर्च कर दिए हैं। ऐसे में मेरे लिए वापस आना भी मुश्किल हो गया है। एजेंट बोला- मेरा काम आपको दुबई भेजना था, अब मुझे कुछ पता नहीं झुंझुनूं निवासी मोहम्मद शोहेब अली भी इसी परेशानी में फंसे हैं। शोहेब का कहना है कि मैंने भी एजेंट सुरेश को 50 हजार रुपए देकर दुबई जाने का इंतजाम किया था। मुझे भारत में एक कंपनी और नौकरी के बारे में बताया गया था, लेकिन दुबई पहुंचने के बाद वह कंपनी ही नहीं मिली। शोहेब बताते हैं कि यहां न तो बताई गई कंपनी है और न ही काम मिल रहा है। जब मैंने एजेंट से बात की तो उसने कहा- मेरा काम आपको दुबई भेजना था। अब मुझे कुछ पता नहीं कि वहां क्या हो रहा है। शोहेब का कहना है कि मेरे पास खाने तक के पैसे नहीं हैं। जिस कंपनी के हवाले हमें किया गया है, वहां भी हमारी जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं है। वीडियो जारी कर बताई पीड़ा … सुबह 4 बजे उठते हैं, रात 8-9 बजे तक काम दुबई में फंसे युवाओं ने एक वीडियो जारी कर अपनी परेशानी बताई है। उनका कहना है कि एजेंट ने भारत में करीब 8 घंटे की ड्यूटी करने की बात कही थी, लेकिन दुबई पहुंचने के बाद हालात अलग निकले। हमें सुबह करीब 4 बजे उठना पड़ता है। सुबह 5 से 5:30 बजे तक काम के लिए निकल जाते हैं और रात 8-9 बजे तक काम करते हैं। यानी हमें तय ड्यूटी से कई घंटे ज्यादा काम करना पड़ रहा है। सैलेरी कब मिलेगा, इसकी भी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। हमें दो महीने बाद सैलरी देने की बात कही जा रही है। रहने की ठीक व्यवस्था नहीं, खाने के पैसे भी नहीं युवाओं का कहना है कि हमारे रहने की व्यवस्था भी ठीक नहीं है। खाने की समस्या अलग है। हमारे पास रोजमर्रा का खाना खरीदने तक के पैसे नहीं बचे हैं। ऐसे में बिना वेतन के दो महीने गुजारा करना बेहद मुश्किल है। युवाओं के मुताबिक, जब हम अपने पासपोर्ट वापस मांगते हैं तो हमसे पैसे मांगे जाते हैं। वहीं, कमरों से बाहर निकालने की धमकी भी दी जा रही है।