साकेत नगर थाना क्षेत्र के ग्राम सराधना (पाली बॉर्डर) में करीब छह महीने से लापता लीला देवी के मामले का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने हत्या के आरोपी राजेंद्र गिरी को गिरफ्तार कर उसकी निशानदेही पर बिलाड़ा क्षेत्र के बीनावास स्थित एक खेत से लीला देवी का नरकंकाल बरामद किया है। आरोपी को कोर्ट में पेश कर चार दिन के रिमांड पर लिया गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार लीला देवी पत्नी चिमनसिंह गत फरवरी से लापता थीं। परिजनों ने बताया कि 13 फरवरी को उनकी लीला से अंतिम बार फोन पर बात हुई थी। इसके बाद 14 और 15 फरवरी को फोन करने पर कोई जवाब नहीं मिला और 15 फरवरी के बाद उनका मोबाइल लगातार बंद आने लगा। लापता होने से पहले लीला देवी ने अपनी मां से दशा माता मंदिर में पूजा करने जाने की बात कही थी। इस संबंध में परिजनों ने 11 अप्रैल को साकेत नगर थाने में लीला के घर से बिना बताए चले जाने की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। बाद में लीला के पुत्र राकेश सिंह ने 11 अगस्त को एक अन्य रिपोर्ट दर्ज करवाकर आरोप लगाया कि किराए के मकान का ताला तोड़कर करीब आठ लाख रुपए नकद, सोने-चांदी के आभूषण और घरेलू सामान चोरी कर लिया गया है। परिजनों ने लीला के अपहरण व हत्या की आशंका जताते हुए पुलिस से मामले की गंभीरता से जांच की मांग की थी। पुलिस जांच में सामने आया कि लीला के मोबाइल में राजेंद्र गिरी की सिम और राजेंद्र गिरी के मोबाइल में लीला की सिम लगी हुई थी। इसी आधार पर पुलिस ने तकनीकी जांच करते हुए राजेंद्र गिरी को ट्रेस किया। पुलिस टीम ने 23 अगस्त को आरोपी को उसके गांव पिच्याक से गिरफ्तार कर ब्यावर ले आई। पूछताछ के दौरान आरोपी राजेंद्र गिरी ने पुलिस के समक्ष लीला की हत्या करने तथा शव को दफनाने की बात कबूल की। पुलिस के अनुसार राजेन्द्र गिरी 13 मार्च को लीला को अपने साथ बीनावास (बिलाड़ा) स्थित खेत पर ले गया था। खेत में बनी झोंपड़ी में उसकी हत्या करने के बाद शव को खेत में ही दफना दिया गया। थानाधिकारी की टीम ने किया ब्लाइंड मर्डर का खुलासा साकेत नगर थानाधिकारी सुरजीत सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर इस ब्लाइंड मर्डर का खुलासा किया। आरोपी की निशानदेही पर को खेत में दफनाए गए शव के अवशेष निकालकर नरकंकाल बरामद किया गया, जिसे ब्यावर के राजकीय अमृतकौर चिकित्सालय की मॉर्च्युरी में रखवाया गया। पुलिस के अनुसार नरकंकाल का बुधवार को अजमेर के जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय में पोस्टमार्टम कराया गया। इसके बाद नरकंकाल परिजनों को सौंपा गया।