देशभर में रक्षाबंधन पर्व शुक्रवार को पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया। इस बार कई साल बाद ऐसा संयोग बना, जब रक्षाबंधन के दिन भद्रा नहीं रही। श्रावण पूर्णिमा 27 अगस्त को सुबह 9:08 बजे से 28 अगस्त सुबह 9:48 बजे तक रही। ऐसे में शुक्रवार को सूर्योदय के समय पूर्णिमा होने के कारण इसी दिन रक्षाबंधन मनाया गया। वहीं भद्रा 28 अगस्त के सूर्योदय से पहले ही खत्म हो गई थी। ऐसे में बहनों ने बिना भद्रा की रोक के भाइयों की कलाई पर राखी बांधी। रक्षाबंधन पर बहनों ने भाइयों को तिलक लगाकर आरती की और उनकी कलाई पर राखी बांधी। इसके बाद भाइयों ने बहनों को उपहार दिए। उनकी रक्षा और साथ देने का संकल्प लिया। घरों में सुबह से ही पूजा और राखी बांधने का सिलसिला शुरू हो गया। परिवारों में मिठाई बांटकर एक-दूसरे को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दी गईं। श्योपुर गांव में चौथी पीढ़ी तक निभाई परंपरा श्योपुर गांव में महावीर टेलर और रामअवतार टेलर परिवार में रक्षाबंधन की परंपरा चौथी पीढ़ी तक पहुंच गई है। परिवार में बुआ और बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनके सुख, समृद्धि, अच्छी सेहत और लंबी उम्र की कामना की। परिवार के सदस्यों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर पर्व मनाया और पारिवारिक परंपरा को आगे बढ़ाया। दो दिन रही पूर्णिमा इस बार पूर्णिमा तिथि दो तारीखों में रहने के कारण रक्षाबंधन की तारीख को लेकर लोगों में असमंजस भी रहा। पूर्णिमा 27 अगस्त को सुबह शुरू हुई, लेकिन 28 अगस्त के सूर्योदय के समय पूर्णिमा होने के कारण रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया गया। यही वजह रही कि 27 अगस्त की बजाय 28 अगस्त को राखी बांधने का दिन माना गया। भद्रा को लेकर नहीं रही रोक रक्षाबंधन पर आमतौर पर लोग भद्रा के समय राखी बांधने से बचते हैं। इस बार भद्रा 27 अगस्त को ही समाप्त हो गई थी। 28 अगस्त को सूर्योदय के समय भद्रा नहीं थी, इसलिए राखी बांधने के शुभ समय पर भद्रा की कोई रोक नहीं रही। इसी कारण इस बार लोगों ने बिना भद्रा की चिंता के सुबह शुभ समय में राखी बांधी। राजस्थान रोडवेज में महिलाओं को दो दिन मुफ्त सफर रक्षाबंधन पर राजस्थान सरकार ने महिलाओं और बालिकाओं को रोडवेज बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा दी। राजस्थान रोडवेज की साधारण और एक्सप्रेस बसों में 28 और 29 अगस्त को महिलाएं राजस्थान की सीमा के अंदर मुफ्त सफर कर सकेंगी। यह सुविधा वोल्वो, एसी और लग्जरी बसों में लागू नहीं है। रक्षाबंधन पर बड़ी संख्या में बहनें भाइयों के घर पहुंचीं। ऐसे में बस स्टैंड और बसों में भी सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा भीड़ रही।