धौलपुर के ऐतिहासिक तीर्थराज मचकुंड सरोवर पर मंगलवार को ऋषि पंचमी का पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। सुबह से ही सरोवर पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी थी। हजारों महिलाओं ने मचकुंड में आस्था की डुबकी लगाई और पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की। साधु-संतों ने भी सरोवर में स्नान किया और धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लिया। ऋषि पंचमी के मौके पर महिलाओं ने सप्त ऋषियों की कथा सुनी। उन्होंने मचकुंड परिसर के मंदिरों में भी पूजा-अर्चना की। श्रद्धालुओं ने साधु-संतों को दान-दक्षिणा दी और भोजन भी कराया। दिनभर मचकुंड परिसर में धार्मिक गतिविधियां और भजन-कीर्तन होते रहे। देव छठ पर उमड़ेगा आस्था का सैलाब मचकुंड का प्रसिद्ध वार्षिक लक्खी मेला ऋषि पंचमी से देव छठ तक लगता है। ऋषि पंचमी पर संत समाज के शाही स्नान के साथ मेले की शुरुआत हुई। देव छठ के दिन सरोवर में मुख्य पर्व स्नान होगा। इस दौरान राजस्थान के साथ-साथ उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश समेत आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। देव छठ पर नवविवाहित जोड़े शादी के दौरान पहनी जाने वाली मोहरियों और कलंगियों को मचकुंड सरोवर में विसर्जित करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस परंपरा से नए जोड़े सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हैं। सभी तीर्थों का भांजा है तीर्थराज मचकुंड धार्मिक मान्यताओं के चलते तीर्थराज मचकुंड को सभी तीर्थों का भांजा कहा जाता है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने राक्षस कालयवन को मारने के लिए राजा मुचुकुंद की दिव्य शक्ति का इस्तेमाल किया था। इसी पौराणिक कहानी के कारण मचकुंड की धार्मिक अहमियत है। महंत कृष्णदास ने बताया कि ऋषि पंचमी से देव छठ तक हर साल मचकुंड में प्रसिद्ध लक्खी मेला लगता है। इस मेले में दूर-दराज के इलाकों से हजारों श्रद्धालु आते हैं और धार्मिक परंपराओं में शामिल होकर पुण्य कमाते हैं।