राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ एंड साइंसेज में मरीजों की सुविधाएं तो बढ़ रही हैं, लेकिन ​नए-नए नियम-कायदे लगातार मरीजों की परेशानी बढ़ा रहे हैं। लंबे इंतजार के बाद शुरू हुई एमआरआई सुविधा पर पिछले दिनों नया नियम शुरू किया गया, जिसके बाद से मरीजों की परेशानी ओर बढ़ गई है। इस नए नियम के तहत डॉक्टर (यूनिट हेड या ऑथोराइज्ड डॉक्टर) की लिखी पर्ची को भी एक टेक्नीशियन से अप्रूव करवाया जा रहा है। टेक्नीशियन की मंजूरी के बाद ही मरीजों की सिटी स्कैन या एमआरआई की जांच की जाएगी। नया नियम से ओपीडी के मरीजों के लिए समस्या बढ़ गई है। अगर कोई डॉक्टर सिटी स्कैन या एमआरआई की जांच लिख रहा है तो उसे करवाने से पहले मरीज को रेडियो टेक्नीशियन से उस जांच पर्ची को अप्रूव्ड करवाना होगा। ये टेक्नीशियन भी ओपीडी समय तक ही हॉस्पिटल में रहता है। अगर किसी कारण से टेक्नीशियन नहीं मिला तो मरीज को भटकना पड़ता है। दोपहर 2 बजे बाद मरीज पहुंचा तो जांच नहीं कैंसर मरीजों के लिए कोई सुविधा नहीं इधर कैंसर इंस्टीट्यूट में भर्ती या ओपीडी में आए मरीजों को भी इस सुविधा का लाभ नहीं मिल रहा। जबकि सरकार ने जब आरयूएचएस में एमआरआई, सिटी-स्कैन की सुविधा शुरू की थी, तब एक अलग से आदेश जारी करके कैंसर इंस्टीट्यूट के मरीजों को भी यहां सिटी स्कैन, एमआरआई करने की सुविधा देने के निर्देश दिए थे, ताकि मरीजों को 12 किलोमीटर दूर एसएमएस हॉस्पिटल नहीं जाना पड़े। लेकिन स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में अब भी मरीजों को जांच के लिए एसएमएस हॉस्पिटल भेजा जा रहा है। --- ये खबर भी पढ़ें…. RUHS में ब्लड टेस्ट में बड़ी गड़बड़ी:पैरो का इलाज करवाने गए युवक को बताई किडनी फेल, प्राइवेट लैब में नॉर्मल आई रिपोर्ट राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ एंड साइंसेज (RUHS) हॉस्पिटल में गलत जांच ने मरीज की मुश्किले बढ़ा दी। पैर दर्द के इलाज के लिए RUHS गए युवक की जब ब्लड जांच करवाई तो उसे देखकर डॉक्टर ने किडनी फेल बता दी। परेशान युवक अगले दिन किडनी रोग विशेषज्ञ के गया, ब्लड जांच करवाने के लिए कहा और अब की बार जांच प्राइवेट लैब में करवाई तो नॉर्मल आई। (पूरी खबर पढ़ें)