20 जुलाई को दिल्ली में CJP के संसद मार्च के दौरान पैलेट गन से घायल साहिल लोहचब की आंखों में आज भी दो छर्रे फंसे हैं। दो बार सर्जरी के बावजूद आंखों की रोशनी लौटने की उम्मीद कम है। साहिल ने बताया कि वह दिल्ली पुलिस भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। परिवार का खर्च चलाने के लिए पार्ट टाइम ड्राइवर का काम भी करते थे। जंतर-मंतर पर परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर प्रदर्शन शुरू हुआ, तो साहिल छात्रों का समर्थन करने के लिए वहां चले गए। साहिल का आरोप है कि FIR दर्ज कराने के लिए परिवार ने कई बार पुलिस से संपर्क किया, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। 21 अगस्त को राहुल गांधी करीब 6 घंटे संसद मार्ग थाने के बाहर धरने पर बैठे, जिसके बाद शिकायत पर FIR दर्ज हुई। 20 जुलाई के प्रदर्शन में क्या हुआ, पैलेट गन से कैसे घायल हुए, राहुल गांधी से कैसे बात हुई, इन सवालों का जवाब लेने दैनिक भास्कर साहिल के घर पहुंचा, पढ़िए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू… सवाल-1: 20 जुलाई को क्या हुआ? जवाब: मैं CJP प्रोटेस्ट में गया था। जंतर-मंतर पर लाठीचार्ज शुरू हुआ। हम भीड़ के साथ कनॉट प्लेस सर्कल पर पहुंचे। वहां पहले आंसू गैस के गोले छोड़े गए। मेरे हाथ में भारत का झंडा था। तभी मेरे ऊपर पैलेट गन चली। मैं सुन्न हो गया। सवाल-2: पैलेट गन लगने के बाद क्या हुआ? जवाब: मेरी हालत खराब होने पर मुझे लेडी हार्डिंग अस्पताल ले गए। लेडी हार्डिंग में 6 से 7 घंटे रखा गया। उसके बाद सफदरजंग भेजा गया। यहां से मुझे एम्स भेजा गया। पहले एम्स के आई-सेंटर भेजा गया, वहां से फिर ट्रॉमा सेंटर भेजा गया। मेरी आंख की दो बार सर्जरी हो चुकी है, लेकिन अभी भी मैं देख नहीं सकता। डॉक्टरों ने एक महीने का समय दिया है। रोशनी आने के चांस बहुत कम हैं। मेरे दाहिने हाथ में आज भी नसें दबी हुई हैं। मेरी आंख में दो पैलेट अभी भी हैं। मुझे भी 4 से 5 दिनों तक तो होश ही नहीं था। आगे जानेंगे कि साहिल छात्रों के प्रदर्शन में क्यों गए, लेकिन उससे पहले भास्कर नॉलेज में जानिए पैलेट गन क्या है। सवाल-3: आप जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन में क्यों गए? जवाब: मैं नीट पेपर लीक और परीक्षाओं में गड़बड़ी के खिलाफ था और प्रदर्शन में योगदान देना चाहता था, इसलिए 20 जुलाई को संसद मार्च में शामिल हुआ था। सवाल-4: क्या आपने खुद से FIR दर्ज कराने की कोशिश की थी? जवाब: 14 अगस्त को मेरी मां और वकील थाने गए थे, लेकिन FIR नहीं लिखी गई। फिर हमने डाक से भी शिकायत भेजी और दिल्ली पुलिस को ईमेल भी भेजा था, लेकिन FIR नहीं हुई। हमें FIR की रिसीविंग भी नहीं मिली। सवाल-5: कितनी बार थाने गए, किस अफसर से मिले? जवाब: दो से तीन बार थाने गए। कोई सीनियर अधिकारी तो हमसे बात करने को तैयार ही नहीं था। हम लोग क्राइम ब्रांच भी गए थे। वहां भी हमारी सुनवाई नहीं हुई। कोई जवाब नहीं मिल रहा था। सवाल-6: आप राहुल के संपर्क में कैसे आए? क्या राहुल ने खुद संपर्क किया? जवाब: करीब 5 दिन बाद राहुल गांधी की टीम ने मेरी मम्मी से बात की। उन्होंने हेल्थ अपडेट मांगा था। हमने बताया कि हमारी FIR नहीं लिखी जा रही है। तब उन्होंने खुद ही हमें बुलाया। इसके बाद 21 अगस्त की सुबह हम लोग उनके पास पहुंचे। उसके बाद उनके साथ ही पहले कनॉट प्लेस थाने गए। राहुल से मुलाकात को मैं भाग्यशाली मानता हूं। सवाल-7: आपके घर में कौन-कौन हैं? जवाब: परिवार में हम तीन भाई हैं। पिता दीपक दिव्यांग हैं। मैं पढ़ाई के साथ परिवार का खर्च चलाने में भी मदद कर रहा था। अब मुश्किल हो रही है। मां ज्योति बोलीं- बेटे की जब खबर मिली तो घबरा गई थी सवाल: आपको बेटे के हादसे के बारे में जानकारी कब मिली? जवाब: 20 जुलाई की सुबह करीब 10 बजे साहिल घर से निकले थे, लेकिन जब 3 बजे भी उन्होंने फोन नहीं उठाया तो मैं घबरा गई। इसके बाद लेडी हार्डिंग अस्पताल से परिवार को फोन आया। ये बताया गया कि आपके बेटे साहिल को चोट लग गई है। तब हम लेडी हार्डिंग पहुंचे। सवाल: पैलेट गन की जानकारी कब मिली जवाब: हम टीवी में देख रहे थे। इतना तो लगा कि हाथ में चोट लगी होगी, लेकिन यह नहीं पता था कि पैलेट गन चली है। ये अस्पताल में जाने के बाद ही हमें पता चला। प्रदर्शन में घायल हुए बाकी लोग शेख इरशाद मंसूरी, 25 साल: चेहरे और गर्दन में पैलेट लगे थे। लेडी हार्डिंग अस्पताल में सर्जरी पैलेट निकाले गए और 24 जुलाई को डिस्चार्ज किया गया। प्रशांत कुमार सिंह, 25 साल: दाहिने हाथ, सीने और जांघ के पास चोट लगी। लेडी हार्डिंग अस्पताल में इलाज हुआ; बाद की एक्स-रे जांच में कम से कम 10 कण शरीर में रह जाने की बात सामने आई। नूतन टोप्पो: दाहिने कान में गंभीर चोट लगी और कान का एक हिस्सा लगभग कट गया। आरएमएल अस्पताल में सर्जरी कर कान की मरम्मत की गई; बाद में वह अपने शहर लौट गईं। साक्षी, 21 साल: प्रदर्शन के दौरान गंभीर रूप से घायल हुईं और आरएमएल अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया। करीब एक हफ्ते वेंटिलेटर पर रहीं; 22 जुलाई को वेंटिलेटर से हटाया गया और 30 जुलाई को अस्पताल से छुट्टी मिली। उनका मामला पैलेट चोट का नहीं, बल्कि प्रदर्शन के दौरान हुई गंभीर चोटों का था। भारत में भीड़ नियंत्रण: कब कितना बल प्रयोग जरूरी? हटने का आदेशः BNSS की धारा 148(1) के अंतर्गत 5 या ज्यादा लोगों की भीड़ से सार्वजनिक शांति भंग होने का खतरा हो तो कार्यकारी मजिस्ट्रेट या अधिकृत पुलिस अधिकारी भीड़ को हटने का आदेश दे सकता है। बल का इस्तेमालः आदेश के बाद भीड़ नहीं हटती तो BNSS धारा 148(2) के तहत उसे हटाने के लिए बल इस्तेमाल किया जा सकता है। लाठीचार्जः पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो के मुताबिक जितनी भीड़ हो उस हिसाब से जरूरी बल इस्तेमाल किया जाए। भीड़ बिखरते ही लाठीचार्ज रोकना चाहिए। सिर पर वार नहीं किया जाना चाहिए। आंसू गैसः टियर गैस का इस्तेमाल स्थिति के अनुसार किया जा सकता है। हवा की दिशा और गति जैसे मौसम संबंधी हालात ध्यान में रखना जरूरी है। पैलेट/रबर बुलेटः इन्हें ऐसी स्थिति में विकल्प बताया गया है, जहां लाठीचार्ज असरदार न हो, जैसे भारी पत्थरबाजी। सशस्त्र बलः जब दूसरे तरीकों से भीड़ को हटाना संभव न हो और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए जरूरी हो, तब कार्यकारी मजिस्ट्रेट सशस्त्र बल की मदद ले सकता है। BNSS धारा 149 में कम से कम जरूरी बल इस्तेमाल करने की बात है। ------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… राहुल का 6 घंटे धरना, तब पैलेटगन मामले में FIR:कोई नामजद नहीं, प्रदर्शनकारी बोला-आंख खराब हुई; राहुल छात्र के साथ थाने से रवाना राहुल गांधी के 6 घंटे धरने के बाद दिल्ली पुलिस ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले छात्र साहिल की FIR दर्ज कर ली। लेकिन मामला अज्ञात पर दर्ज किया गया है। पूरी खबर पढ़ें…