सलूम्बर नगर परिषद के चुनाव परिणाम सामने आने के बाद शहर की सियासत में हलचल तेज हो गई है। 25 वार्डों में 11 सितंबर को मतदान और 14 सितंबर को मतगणना पूरी होने के बाद भाजपा और कांग्रेस ने अपने नए पार्षदों की बाड़ेबंदी शुरू कर दी। मतगणना पूरी होने के बाद दोपहर में सलूम्बर उपखंड कार्यालय स्थित निर्वाचन कार्यालय में नए पार्षदों को शपथ दिलाई गई। शपथ ग्रहण कार्यक्रम खत्म होते ही भाजपा और कांग्रेस के पार्षद अलग-अलग समूहों में निजी बसों से अज्ञात जगह के लिए रवाना हो गए। शपथ ग्रहण के बाद दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपने नए पार्षदों को एकजुट रखा और उन्हें निजी बसों में बैठाया। इसके बाद बसें सलूम्बर से निकल गईं। पार्षदों को कहां ले जाया गया, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि दोनों दल अपने पार्षदों को सलूम्बर जिले से बाहर किसी होटल में ठहराने की तैयारी में हैं। नगर परिषद में अध्यक्ष पद सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित है। ऐसे में बहुमत जुटाने और अध्यक्ष पद पर अपने उम्मीदवार को बैठाने के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पूरी ताकत लगा रहे हैं। मतगणना के बाद पार्षदों की शपथ और उसके तुरंत बाद शुरू हुई बाड़ेबंदी को इसी सियासी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। सलूम्बर नगर परिषद के 25 वार्डों के लिए 11 सितंबर को मतदान हुआ था। चुनाव में कुल 62 उम्मीदवार मैदान में थे, जिनमें भाजपा के 25 एवं कांग्रेस के 25 एवं bap के 3 और 9 निर्दलीय शामिल थे। मतदान का प्रतिशत 78.69 प्रतिशत रहा था। अब पार्षदों के परिणाम आने के बाद नगर परिषद की सत्ता की अगली तस्वीर अध्यक्ष पद के चुनाव से साफ होगी।