भास्कर न्यूज | भरतपुर सावन बीतने को है, लेकिन अभी तक पांचना बांध से केवलादेव घना को पानी नहीं मिला है। इस कारण मजबूरन घना प्रशासन ने गोवर्धन ड्रेन से पानी लेना प्रारंभ कर िदया है। अभी तक 12 एमसीएफटी पानी लिया गया है। फिलहाल दो पंप चलाए जा रहे हैं। गोवर्धन ड्रेन से दो साल बाद पानी लिया गया है। केवलादेव घना के डीएफओ चेतन कुमार ने बताया कि पानी की टेस्टिंग करा ली है, जिसमें हैवी मैटल नहीं है। घना को पानी की सख्त जरुरत है। इसलिए गोवर्धन ड्रेन का पानी ले रहे हैं। इधर, गोवर्धन कैनाल से पानी की आवक शुरू होने के साथ ही सूखते जलाशयों में जीवन लौटने की उम्मीद बनी है। लेकिन यह राहत केवल तत्काल संकट को टालने वाली है। उद्यान के वेटलैंड तंत्र के लिए यूनेस्को ने लगभग 550 मिलियन क्यूबिक फीट पानी प्रतिवर्ष आवश्यक माना जाता है। चंबल प्रोजेक्ट से करीब 15 एमसीएफटी मिला है। बी, डी और ई ब्लॉक भर चुके हैं। इन ब्लॉकों में फिलहाल लगभग 1 से 1.5 फीट पानी है। के ब्लॉक को गोवर्धन कैनाल और चंबल के पानी से भरा जा रहा है। इसके बाद एल और एन ब्लॉक भरा जाएगा। .लेकिन चिंता... गोवर्धन का पानी इंडस्ट्रीज एरिया का, वनस्पति के लिए अनुकूल नहीं... कामां, पहाड़ी, जुरहरा, छाता, कोसी और आसपास के ढलान वाले क्षेत्रों में अच्छी बारिश के बाद यहां उपलब्ध अतिरिक्त वर्षा जल को लगभग गोवर्धन कैनाल से लिफ्ट कर केवलादेव तक पहुंचाया जाता है। इस इलाके में इंडस्ट्रीयल एरिया है। ऐसे में पानी के साथ हैवी मैटल आने की शिकायत रहती है। यद्यपि घना प्रशासन ने दावा है कि टेस्टिंग करा ली गई है और हैवी मैटल नहीं है। .मानसून सीजन में करते हैं पक्षी प्रजनन, उनके जिए पानी जरूरी ... बारिश के मौसम में लगभग 17 जलपक्षी प्रजातियां पेंटेड स्टॉर्क, स्पूनबिल, डार्टर, कॉर्मोरेंट, इबिस, एग्रेट और हेरॉन आदि प्रजनन करती हैं, जिनके लिए झीलों में पानी भरा रहना जरूरी है। यह उनके खाद्य और सुरक्षा के लिए जरूरी है। इस साल पानी नहीं होने के कारण 11 प्रजातियां बाहर मलाह वेटलैंड और अटलबंद वेटलैंड जैसे आसपास के आर्द्र क्षेत्रों में प्रजनन कर रही हैं। केवलादेव के भीतर अभी पेंटेड स्टॉर्क, स्नेकबर्ड/डार्टर, लार्ज, लिटिल और मीडियम कॉर्मोरेंट तथा इंडियन शैग जैसी प्रजातियों के प्रजनन की प्रतीक्षा है।