एक पिता ने बेटे को खिलाड़ी बनाने का सपना देखा। किसान परिवार से आने वाले मंजीत सिंह ने इस सपने को हकीकत में बदलने के लिए अपना कारोबार तक छोड़ दिया। सीमित संसाधनों के बीच बेटे के प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं और यात्राओं का खर्च उठाया। मेहनत रंग लाई तो सिद्धार्थ चौधरी ने शॉटपुट में देश-प्रदेश का नाम रोशन किया। अब वही सिद्धार्थ हजारों किलोमीटर दूर अमेरिका में अपने खेल और पढ़ाई का नया अध्याय शुरू करने जा रहा है। मगर इस कामयाबी के बीच एक टीस भी है, राजस्थान में चार साल से बकाया पुरस्कार राशि का इंतजार आज भी खत्म नहीं हुआ है। उपलब्धियों की लंबी फेहरिस्त : 2023 में एशियन अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में स्वर्ण जीता। 2024 में साउथ एशियन जूनियर चैंपियनशिप में स्वर्ण और एशियन अंडर-20 चैंपियनशिप में कांस्य पदक। 2022 में एशियन यूथ चैंपियनशिप में कांस्य। राष्ट्रीय स्तर पर वह जूनियर चैंपियनशिप, फेडरेशन कप और खेलो इंडिया यूथ गेम्स में स्वर्ण जीत चुके हैं। यहां खिलाड़ी को पढ़ाई और खेल में संतुलन बनाना पड़ता है और विश्वविद्यालय ‘स्टूडेंट एथलीट’ तैयार करने पर जोर देता है। मेरा सपना अब भी साफ है, विदेश में मिली सुविधाओं का इस्तेमाल कर भारत के लिए बेहतर प्रदर्शन करना।’ -सिद्धार्थ चौधरी, अंतरराष्ट्रीय शॉटपुट खिलाड़ी जूनियर लेवल पर कई रिकॉर्ड हैं सिद्धार्थ के नाम राजस्थान के अंतरराष्ट्रीय शॉटपुटर सिद्धार्थ चौधरी ने जूनियर स्तर पर एशिया में स्वर्ण सहित छह अंतरराष्ट्रीय पदक जीते हैं। उनके नाम अंडर-18 इंडिया रिकॉर्ड, जूनियर साउथ एशियन रिकॉर्ड और यूथ नेशनल रिकॉर्ड भी हैं। सिद्धार्थ के पिता एवं कोच मंजीत सिंह का दावा है कि राज्य की विभिन्न उपलब्धियों के लिए घोषित करीब 15-20 लाख रुपए की पुरस्कार राशि अभी बकाया है। परिवार के अनुसार, इस संबंध में कई बार खेल विभाग और संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया गया, लेकिन पुरस्कार राशि नहीं मिल सकी। स्पोर्ट्स मीडिया कोर्स भी करेंगे : अमेरिका की नॉर्थ कैरोलिना स्थित हाई प्वाइंट यूनिवर्सिटी ने सिद्धार्थ की प्रतिभा को पहचान दी। विवि ने चार वर्ष की उच्च शिक्षा और खेल के लिए करीब 6 करोड़ रु. की स्कॉलरशिप दी है। सिद्धार्थ अंतरराष्ट्रीय लेवल के कोचों के साथ तैयारियां शुरू कर दी हैं।