भास्कर न्यूज | भरतपुर पुरोहित मोहल्ला स्थिति वल्लभ संप्रदाय यानी पुष्टिमार्ग के मंदिर श्यामलाल प्रभुजी के मंदिर में बुधवार को हिंडोला उत्सव के दौरान बगीचा मनोरथ मनाया गया। इस मौके पर सामान्य झूला उत्सव से अलग और बहुत भावपूर्ण सेवा की गई। मुखिया जी सोनू ने बताया कि इसका मुख्य भाव श्री ठाकुरजी को वर्षा ऋतु के सुहावने वातावरण में बगीचे/कुंज में विहार कराना है। यह केवल सजावट नहीं बल्कि ठाकुरजी को आनंद प्रदान करने की सेवा का भाव है। पुष्टिमार्गीय परंपरा में बगीचा उत्सव विशेष तिथियों पर अलग-अलग भाव से मनाया जाता है। गर्भगृह को बगीचे जैसा वातावरण सज्जा-विधान किया गया। दर्शन करने वाले को कुंज और बगीचे का अनुभव कराने के लिए हरियाली, पत्तियों, लताओं और फूलों से सजावट की गई। फूलों और प्राकृतिक सामग्री का विशेष उपयोग किया गया। हिंडोले तथा आसपास के क्षेत्र को फूलों और वनस्पति से सजाया गया। बाद में करीब 250 साल पुराने हिंडोले में ठाकुरजी को विराजमान कराया गया। श्रीजी को विशेष श्रृंगार के साथ हिंडोले में विराजित कर झुलाया गया। हवेली संगीत और कीर्तन... बगीचे, कुंज, वर्षा और झूले के भाव वाले पद गाए गए। झूलत श्याम हिंडोरे, बागन में..., बागन में झूलत नंदलाल... जैसे पद गाए गए। जिसमें भक्त और ठाकुरजी के बीच प्रेम तथा सेवा का भाव था। वर्षा ऋतु का भाव, सावन की हरियाली, ठंडी हवा, फूल और झूला—इन सबके माध्यम से ब्रज के उस वातावरण की कल्पना की जाती है, जिसमें श्रीकृष्ण कुंजों में विहार करते हैं। भरतपुर। बल्लभ संप्रदाय के मंदिर में बगीचा मनोरथ मनाया गया।