श्रीगंगानगर में दूध के रेट बढाने को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। पहले उचित भाव की मांग को लेकर दूध उत्पादकों और विक्रेताओं ने तीन दिन तक हड़ताल रखी। इस दौरान जिलेभर से दूध सप्लाई को लेकर विवाद, मारपीट और सड़क पर दूध बहाने की घटनाएं सामने आईं। जिसके बाद गाय-भैंस के दूध में 10 रुपए तक बढ़ोतरी हुई। जिसके बाद गाय का दूध 70 रुपए प्रति लीटर और भैंस का दूध 80 रुपए प्रति लीटर हो गया। वहीं, हड़ताल खत्म होने के बाद दूध की कीमतों में बढ़ोतरी का असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ा तो अब लोग सड़कों पर उतर आए। हालांकि, दूध सप्लायर अभी भी दूध के रेट 100 रुपए प्रति लीटर करने की मांग कर रहे हैं। रेट बढ़ोतरी के खिलाफ प्रदर्शन दूध के बढ़े रेट के विरोध में गजसिंहपुर में लोगों ने विरोध-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि दूध रोजमर्रा की जरूरत है। इसके रेट बढ़ने का सीधा असर आम परिवार के मासिक बजट पर पड़ता है। बच्चों के दूध से लेकर चाय और घर में इस्तेमाल होने वाली दूसरी चीजों तक हर जगह खर्च बढ़ गया है। दूधवालों ने 3 दिन रखा था काम बंद इस विवाद की शुरुआत दूध उत्पादकों और विक्रेताओं की मांगों को लेकर हुई हड़ताल से हुई थी। जिले में दूध विक्रेताओं ने तीन दिन तक दूध की सप्लाई बंद रखी। उनका कहना था कि मौजूदा लागत के हिसाब से दूध के उचित रेट नहीं मिल रहे हैं। पशुओं के चारे, फीड और रखरखाव सहित दूध उत्पादन की लागत लगातार बढ़ रही है। हड़ताल के दौरान दूध की सप्लाई प्रभावित होने से शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। दूध सप्लाई को लेकर कई जगह हुआ हड़ताल के बीच जब कुछ लोगों ने दूध की सप्लाई शुरू करने की कोशिश की तो जिले के अलग-अलग हिस्सों से विवाद की घटनाएं सामने आईं। कहीं दूध सप्लाई करने वालों के साथ मारपीट के आरोप लगे तो कहीं विरोध में दूध सड़क पर बहाने की घटना सामने आई। इससे मामला केवल दूध के भाव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दूध की सप्लाई को लेकर भी तनाव की स्थिति बनी। ग्राहक बोले- जेब पर पड़ा असर तीन दिन की हड़ताल के बाद शनिवार को दूध की सप्लाई सामान्य हुई, लेकिन बढ़े हुए रेट ने उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ा दी। दूध खरीदने वाले लोगों का कहना है कि रोजाना इस्तेमाल होने वाली चीज के रेट बढ़ने से सीधे घरेलू बजट प्रभावित हो रहा है।