भाजपा के सुनील कोठारी जयपुर नगर निगम के मेयर चुने गए हैं। इससे पहले वे भाजपा जयपुर जिलाध्यक्ष के पद पर रह चुके हैं और गहलोत सरकार के खिलाफ अभियान को लेकर चर्चा में आए थे। जिलाध्यक्ष रहते हुए वे अपनी कार्यकारिणी का गठन नहीं कर पाए थे, जिसके बाद उन्हें कुछ ही महीनों में पद छोड़ना पड़ा था। अब मेयर पद पर उनका चुनाव राजनीतिक सफर का नया पड़ाव है। भाजपा के सुनील कोठारी ने कांग्रेस की सुनीता को 29 वोट से हराकर मेयर पद पर कब्जा किया। कोठारी को कुल 89 वोट मिले, जबकि सुनीता के खाते में 60 वोट आए। एक वोट NOTA को गया। खास बात यह है कि जिस सुनील कोठारी ने करीब 40 साल पहले भाजपा की राजनीति में कदम रखा था, उन्हें इस मुकाम तक पहुंचने के लिए कई उतार-चढ़ाव से गुजरना पड़ा। कभी पार्टी ने उन्हें जयपुर शहर की कमान सौंपी थी तो कुछ ही महीनों बाद उन्हें जिलाध्यक्ष का पद छोड़ना पड़ा। इसके बाद करीब ढाई साल तक वे मुख्यधारा की राजनीति में कम सक्रिय रहे। इसके बाद 2023 में पार्टी ने उन्हें फिर संगठनात्मक जिम्मेदारियां दीं और अब पहली बार चुनाव लड़ने वाले कोठारी सीधे जयपुर के मेयर बन गए। 2020 में जयपुर शहर अध्यक्ष बने, 7-8 महीने में ही छोड़ना पड़ा पद सुनील कोठारी के राजनीतिक सफर में 2020 का साल एक बड़े बदलाव के तौर पर सामने आया। जनवरी 2020 में भाजपा ने उन्हें जयपुर शहर का जिलाध्यक्ष बनाया था। लेकिन वे अपनी शहर कार्यकारिणी का गठन नहीं कर पाए। पार्टी के अलग-अलग गुटों के बीच समन्वय बनाने और कार्यकारिणी को अंतिम रूप देने में देरी होती रही। इसके बाद अगस्त 2020 में उन्हें जिलाध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा। यानी शहर अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने के करीब 7-8 महीने बाद ही उन्हें पद छोड़ना पड़ा। यह उनके राजनीतिक सफर का ऐसा दौर था, जब संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने के बाद भी वे लंबे समय तक उस पद पर नहीं रह पाए। इसके बाद करीब ढाई साल तक वे सक्रिय राजनीति में अपेक्षाकृत कम दिखाई दिए। लेकिन यह राजनीतिक सफर का अंत नहीं था। 2023 में फिर हुई वापसी, चुनाव प्रबंधन से दोबारा संगठन में सक्रिय 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने एक बार फिर सुनील कोठारी पर भरोसा जताया। उन्हें प्रदेश स्तरीय चुनाव प्रबंधन समिति और आर्थिक समिति में जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद संगठन में उनकी सक्रियता फिर बढ़ी। इसके बाद पार्टी ने 2026 के नगर निगम चुनाव में उन्हें वार्ड 112 से मैदान में उतारा। कोठारी ने पार्षद का चुनाव जीता और पहली बार खुद चुनावी मैदान में उतरने के बाद सीधे मेयर पद की दौड़ में पहुंच गए। भाजपा ने उन्हें मेयर प्रत्याशी बनाया और शुक्रवार को हुए चुनाव में उन्होंने कांग्रेस की सुनीता को 29 वोट के अंतर से हरा दिया। 40 साल की राजनीति, लेकिन चुनाव लड़ने का मौका अब मिला सुनील कोठारी ने भाजपा की राजनीति में करीब चार दशक पहले कदम रखा था। उन्हें पार्टी में पहला संगठनात्मक दायित्व 1987 में मिला था। उस समय ओम बिरला भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष थे। कोठारी को युवा मोर्चा में शहर कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बाद संगठन में उनका सफर लगातार आगे बढ़ता गया। वे दो बार प्रदेश मंत्री, जयपुर शहर जिलाध्यक्ष और प्रदेश उपाध्यक्ष जैसे पदों पर रहे। लेकिन इतने लंबे राजनीतिक सफर के बावजूद पार्टी ने उन्हें पहले कभी चुनाव मैदान में नहीं उतारा था। 2026 का नगर निगम चुनाव उनके लिए पहला चुनाव था। पहली बार चुनाव लड़कर पार्षद बने और अब उसी चुनावी सफर में मेयर की कुर्सी तक पहुंच गए। म्हारा जयपुर, प्यारा जयपुर अभियान से सड़क पर उतरे सुनील कोठारी केवल संगठनात्मक राजनीति तक सीमित नहीं रहे। 2023 में गहलोत सरकार ने प्रदेश में 17 नए जिले बनाने के साथ जयपुर को भी दो जिलों में बांटने का फैसला किया था। इस फैसले के विरोध में कोठारी ने 'म्हारा जयपुर, प्यारा जयपुर, हमें चाहिए एक जयपुर' अभियान चलाया था। उन्होंने सामाजिक संगठनों और जयपुर के लोगों को साथ लेकर जयपुर को दो जिलों में बांटने के फैसले का विरोध किया। इसी दौरान उन्होंने संकल्प लिया था कि यदि जयपुर को दो हिस्सों में बांटने का फैसला टलता है तो वे सांगानेर के सांगा बाबा मंदिर से आमेर के शिला माता मंदिर तक पदयात्रा निकालेंगे। प्रदेश में सरकार बदलने के बाद जयपुर को दो जिलों में बांटने का फैसला लागू नहीं हुआ। इसके बाद 4 फरवरी 2024 को कोठारी ने अपना संकल्प पूरा करते हुए सांगानेर से आमेर तक पदयात्रा निकाली। पार्टी से दूर हुए तो वापसी भी संगठन के रास्ते से कोठारी के राजनीतिक सफर की खास बात यह रही कि 2020 के झटके के बाद उन्होंने संगठन की राजनीति से दूरी जरूर बनाई, लेकिन भाजपा से उनका जुड़ाव बना रहा। 2023 में पार्टी ने उन्हें दोबारा महत्वपूर्ण समितियों में जिम्मेदारी देकर सक्रिय किया। इसके बाद नगर निगम चुनाव में उन्हें टिकट मिला और अब मेयर पद की जिम्मेदारी भी पार्टी ने उन्हें सौंप दी। भाजपा की ओर से उन्हें मेयर प्रत्याशी बनाए जाने के बाद उनका मुकाबला चार बार की पार्षद सुनीता गुप्ता महावर से था। चुनाव में भाजपा के पास 78 पार्षदों का संख्या बल था, जबकि कांग्रेस के 57 पार्षद थे। लेकिन परिणाम में कोठारी को 89 वोट मिले, यानी भाजपा के अपने पार्षदों से 11 ज्यादा वोट उनके खाते में आए। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी को 60 वोट मिले। अब सामने सबसे बड़ी चुनौती: जयपुर की सरकार चलाने की जिम्मेदारी करीब 40 साल की राजनीतिक पारी, संगठन में कई बड़े पद, 2020 का झटका, करीब ढाई साल की अपेक्षाकृत कम सक्रियता, 2023 में वापसी और फिर पहला चुनाव लड़कर पार्षद बनना सुनील कोठारी के राजनीतिक सफर में अब एक और बड़ा पड़ाव जुड़ गया है। शुक्रवार को 89 वोट के साथ जयपुर के मेयर चुने जाने के बाद अब उनके सामने नगर निगम की जिम्मेदारी संभालने की बारी है। जिस मेयर कक्ष की चुनाव से पहले सफाई कर नए मेयर के स्वागत की तैयारी की जा रही थी, अब उसमें सुनील कोठारी बैठेंगे। उनके सामने जयपुर की सफाई, ट्रैफिक, सड़कों, सीवरेज, अतिक्रमण और निगम की व्यवस्थाओं से जुड़े मुद्दों पर काम करने की जिम्मेदारी होगी। ---------------- ये खबर भी पढ़िए… जयपुर नगर निगम के मेयर बने सुनील कोठारी:जीत के बाद बोले- मजबूत विपक्ष से शहर को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी; 89 वोट मिले बीजेपी के सुनील कोठारी जयपुर नगर निगम के नए मेयर बन गए हैं। मेयर पद के लिए सुनील कोठारी 89 वोट मिले है। वहीं, कांग्रेस की सुनीता मावर को 60 वोट मिले है। कोठारी को पार्टी के पार्षदों के अलावा 11 अन्य वोट मिले और वे बहुमत का आंकड़ा पार जीते। (पूरी खबर पढ़ें…)