सुप्रीम कोर्ट ने अहम आदेश देते हुए कहा- रिश्वत से जुड़े मामलों में सरकारी कर्मचारी के खिलाफ जांच शुरू करने से पहले अनुमति लेने की जरूरत नहीं है। राजस्थान पुलिस के एक कॉन्स्टेबल की अपील को खारिज करते हुए जस्टिस एस. वी. एन. भट्टी और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की बेंच ने ये आदेश दिया। कॉन्स्टेबल तेजाराम ने अपने खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप तय किए जाने को चुनौती दी थी। कॉन्स्टेबल की ओर से कहा गया था कि सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ पीसी एक्ट (भ्रष्टाचार से जुड़े मामले) के तहत जांच से पहले उसके उच्चाधिकारी की मंजूरी जरूरी है, लेकिन उसके मामले में इन प्रावधानों की पालना नहीं की गई। सुप्रीम कोर्ट ने कॉन्स्टेबल तेजाराम की अपील खारिज करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें हाईकोर्ट ने कॉन्स्टेबल के खिलाफ आरोप तय करने वाले ट्रायल कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। डेढ़ लाख रिश्वत मांगने का था आरोप दरअसल, कॉन्स्टेबल तेजाराम सिरोही में डीएसपी ऑफिस में तैनात था। उसके खिलाफ एक अन्य कॉन्स्टेबल ने 22 अप्रैल 2021 को ईमेल के जरिए शिकायत की थी कि तेजाराम ने पुलिस के उच्चाधिकारियों की ओर से डेढ़ लाख रुपए की मांग की थी। 4 जून 2021 को एसीबी ने मामला दर्ज करते हुए तेजाराम को 1 सितंबर 2021 को गिरफ्तार किया था। अभियोजन स्वीकृति मिलने के बाद एसीबी ने 19 जनवरी 2024 को चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद कोर्ट ने उसके खिलाफ आरोप तय कर दिए थे। तेजाराम ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। इसे हाईकोर्ट ने 26 मार्च 2025 को खारिज कर दिया था। इसके बाद उसने सुप्रीम कोर्ट मे अपील दायर की थी। हर मामले में पीसी एक्ट की धारा 17ए नहीं होती लागू सुप्रीम कोर्ट ने कहा- पीसी एक्ट की धारा 17ए किसी भी सरकारी कर्मचारी के आधिकारिक कार्यों या कर्तव्यों के निर्वहन में लिए गए निर्णयों के तहत उसे प्रोटेक्ट करती है। धारा की सीधी भाषा से यह स्पष्ट है कि यह प्रावधान केवल उन्हीं स्थितियों में लागू होता है, जहां किसी लोक सेवक ने अपने आधिकारिक कर्तव्यों का पालन करते हुए कोई सिफारिश की हो या कोई फैसला लिया हो। ऐसे मामलों में इस धारा के तहत किसी लोक सेवक के खिलाफ जांच या पूछताछ शुरू करने से पहले पूर्व अनुमति लेना आवश्यक है। गबन, खातों में हेराफेरी, धोखाधड़ी, विश्वासघात (क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट) और रिश्वत जैसे अपराध इस धारा के दायरे में नहीं आते हैं। ------------- ये खबरें भी पढ़ें... सिरोही SP शराब तस्करों से मिलीभगत में फंसे:कॉन्स्टेबल ने कहा- वॉट्सएप कॉल पर हेड कांस्टेबल ने डेढ़ लाख मांगे, नहीं दिए तो निलंबित किया, हेड कॉन्स्टेबल बोला, ऑडियो में मेरी आवाज नहीं पुलिस का शराब माफियाओं से गठजोड़ का नया अध्याय:कॉन्स्टेबल बोला- तस्करों के खिलाफ कार्रवाई से नाराज थे SP, इसलिए निलंबित किया; एक सिपाही ने उनके नाम पर रुपए भी मांगे थे