जमाअत-ए-इस्लामी हिन्द सवाईमाधोपुर ने आलनपुर सर्किल स्थित एक होटल में वर्तमान समय की चुनौतियां और पैगम्बर मुहम्मद की शिक्षाएं विषय पर सिम्पोजियम किया। इसमें अलग-अलग धर्मों और सामाजिक क्षेत्रों के प्रबुद्धजन शामिल हुए। वक्ताओं ने मौजूदा सामाजिक, नैतिक, मानवीय चुनौतियों पर बात रखी। उनके समाधान पर विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता जमाअत-ए-इस्लामी हिन्द के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रोफेसर मुहम्मद सलीम इंजीनियर ने की। उन्होंने कहा कि समाज के सामने कई तरह की चुनौतियां हैं। समाधान सिर्फ कानून से संभव नहीं। समाधान सिर्फ भौतिक प्रगति से भी नहीं। मानवीय मूल्य मजबूत करने होंगे। नैतिकता जरूरी है। न्याय जरूरी है। करुणा जरूरी है। आपसी सम्मान जरूरी है। जमाअत-ए-इस्लामी हिन्द राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष मुहम्मद नाज़िमुद्दीन ने कहा कि समाज में धार्मिक और सामाजिक विभाजन की प्रवृत्तियां बढ़ रही हैं। इन्हें कम करने के लिए संवाद जरूरी है। एक-दूसरे को समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग आस्था और विचार के बावजूद मानवता, इंसाफ, सद्भाव, सेवा, नैतिक जीवन ऐसे मूल्य हैं, जो सभी को जोड़ते हैं। मानव धर्म आश्रम के महात्मा धनी आनंद ने कहा कि धर्म का मूल उद्देश्य इंसान को बेहतर बनाना है। समाज में प्रेम, शांति, सद्भाव स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि जरूरत है कि लोग अपने-अपने धर्म की श्रेष्ठ शिक्षाओं को जीवन में उतारें। एक-दूसरे की आस्थाओं का सम्मान करें। वक्ताओं ने कहा कि चुनौतियों का सामना टकराव से नहीं होगा। संवाद से होगा। शिक्षा से होगा। सामाजिक जिम्मेदारी से होगा। सिम्पोजियम में विभिन्न धर्मों और सामाजिक वर्गों के लोगों ने सहभागिता की। उद्देश्य समुदायों के बीच संवाद बढ़ाना रहा। पैगम्बर मुहम्मद की शिक्षाओं के मानवीय और सामाजिक पक्ष पर चर्चा रही।