निकाय चुनाव को लेकर सोमवार को मतगणना हुई। जिले में कांग्रेस को झटका लगा है। जिले के 11 निकायों में से 2 जगह सुजानगढ़ व तारानगर में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिला है। वहीं 5 निकाय चूरू, सुजानगढ़, तारानगर, सरदारशहर, रतनगढ़, बीदासर और छापर में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। यहां बोर्ड बनाने के लिए भाजपा को निर्दलीयों का सहारा लेना पड़ेगा। दूसरी तरफ कांग्रेस केवल 3 निकायों राजगढ़, रतननगर और साहवा में ही बढ़त बना पाई है। राजलदेसर में मुकाबला सबसे दिलचस्प हो गया है। यहां भाजपा और कांग्रेस दोनों को 14-14 सीटें मिली हैं। यहां 5 निर्दलीय और आरएलपी के 2 प्रत्याशी बोर्ड बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे। जिले में पिछले चुनाव में कांग्रेस ने 10 निकायों में से 7 जगह बोर्ड बनाए थे। इनमें से कांग्रेस सिर्फ राजगढ़ में बढ़त बना पाई है। वहीं रतननगर में भाजपा अपना बोर्ड नहीं बचा पाई, यहां कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिला है। नई बनी पालिका साहवा में भी कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिला है। चूरू में भाजपा ने 30 सीटें जीती हैं, यहां बहुमत के लिए सिर्फ 1 सीट की जरूरत है। रतनगढ़ में भाजपा ने 21 सीट जीती, यहां बहुमत के लिए 3 सीटों की जरूरत है। सरदारशहर में 25 सीट जीती हैं, यहां भी बहुमत के लिए 3 सीट चाहिए। कांग्रेस की हार की 3 बड़ी वजह 1. टिकट वितरण में मनमानी : जीतने वाले कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर गलत टिकट बांटे गए। 2. लीड का ओवरकॉन्फिडेंस : विधानसभा में मिली 17 हजार की लीड के भरोसे रहे, कोर वोट बैंक को साधने की रणनीति फेल हुई। 3. स्थानीय मुद्दों से दूरी : पिछले दो साल से सफाई, पानी निकासी जैसे मुद्दों पर विपक्ष के रूप में जनता के बीच आक्रामक आंदोलन नहीं किया। भाजपा की जीत के 3 बड़े कारण 1. मुस्लिम बेल्ट में प्रयोग : मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में पार्टी सिंबल के बजाय समर्थित उम्मीदवार उतारे, जो कारगर रहा। 2. डेमेज कंट्रोल : सभापति पद के कई दावेदार होने के बावजूद गुटबाजी को हावी नहीं होने दिया। 3. सत्ता से कड़ी जोड़ने का रुझान : प्रदेश में भाजपा सरकार होने का फायदा मिला, जनता ने विकास के नाम पर वोट दिया। सुजानगढ़; परिसीमन का भी भाजपा को लाभ हुआ सुजानगढ़ | निकाय चुनाव के नतीजों में भाजपा की जीत और कांग्रेस की हार के पीछे कई स्थानीय और राजनीतिक कारण सामने आए हैं। सभापति की सीट ओबीसी होने का भी भाजपा को फायदा मिला। राजनीतिक जानकारों के अनुसार सामान्य सीट होने पर नेताओं की आपसी खींचतान और गुटबाजी ज्यादा खुलकर सामने आ सकती थी। लॉटरी से पहले भी कई नेताओं में मनमुटाव थे। नए परिसीमन का लाभ भी भाजपा को मिला। कांग्रेस के खिलाफ 10 साल से बोर्ड में रहने की एंटी इनकंबेंसी सबसे बड़ा कारण रही। शहर में जलभराव को लेकर लोगों में नाराजगी थी। 36 वार्डों में ही प्रत्याशी उतारे, जिससे कई जगह पार्टी का चुनावी माहौल कमजोर रहा। टिकट वितरण में कार्यकर्ताओं में असंतोष रहा। नए परिसीमन से पुराने राजनीतिक समीकरण बदले और कई वार्डों में जीत-हार के समीकरण उलट गए। समर्थकों में खुशी {जिले के 7 निकायों में भाजपा को बढ़त; पिछली बार कांग्रेस था ये स्कोर{सुजानगढ़-तारानगर में भाजपा को स्पष्ट बहुमत, चूरू में 30 सीट{रतननगर-साहवा में कांग्रेस को मिला बहुमत, राजगढ़ में बढ़त फोटो चूरू का विस चुनाव में 17 हजार की लीड भी काम न आई, भाजपा ने कांग्रेस से छीनी सत्ता : चूरू नगर परिषद में मतदाताओं ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर भरोसा जताया है। भाजपा ने पिछले चुनाव के मुकाबले 13 सीटों की छलांग लगाते हुए 30 वार्डों पर कब्जा जमाया। वहीं कांग्रेस को 12 सीटों का नुकसान हुआ, वह 24 सीटों पर सिमट गई। 6 वार्डों में निर्दलीय जीते हैं। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को चूरू शहर से 17 हजार से अधिक वोटों की लीड मिली थी, लेकिन निकाय चुनाव में पार्टी इस बढ़त को बरकरार रखने में नाकाम रही।