प्रताप नगर थाने के हेड कांस्टेबल की ओर से जब्त सीएनजी ऑटो छोड़ने के लिए 5 हजार रुपए रिश्वत मांगने का मामला सामने आया है। फरियादी कोर्ट से रिलीज ऑर्डर लेकर थाने पहुंचा तो आरोपी हेड कांस्टेबल ने क्रेन, पेट्रोल व खाने का खर्च बताकर पहले 5 हजार रुपए मांगे। बाद में तीन हजार रुपए देना तय हुआ। शिकायत का सत्यापन करने के बाद एसीबी ने आरोपी को पकड़ने के लिए जाल बिछाया। पीड़ित रुपए देने पहुंचा तो आरोपी को शक हो गया और उसने रुपए नहीं लिए। एसीबी ने आरोपी के खिलाफ वॉयस रिकॉर्डिंग के आधार पर केस दर्ज किया है। 10 जुलाई को प्रताप नगर क्षेत्र में नाकाबंदी के दौरान पुलिस ने सीएनजी ऑटो जब्त किया। ऑटो परिवादी के नाम था और उसके पिता चलाते थे। 16 जुलाई को अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-14, जयपुर की कोर्ट ने ऑटो रिलीज करने का आदेश जारी कर दिया। एसीबी ने वॉयस रिकॉर्डिंग के आधार पर दर्ज किया मुकदमा 17 जुलाई को युवक रिलीज ऑर्डर लेकर प्रताप नगर थाने पहुंचा। वहां हेड कांस्टेबल सुभाष चंद और कांस्टेबल गजानंद से मिला। सुभाष चंद ने रिलीज ऑर्डर अपने पास रख लिया और ऑटो छोड़ने के बदले 5 हजार रुपए मांगे। फिर बातचीत के बाद 3 हजार रुपए देना तय किया। इसके बाद परिवादी ने एसीबी में शिकायत की और सत्यापन कराया। परिवादी और हेड कांस्टेबल के बीच बातचीत रिकॉर्ड की गई, जिसमें हेड कांस्टेबल ने ऑटो छोड़ने के बदले रुपए मांगे। पहले 5 हजार रुपए मांगे, फिर ​3 हजार रुपए लेना तय किया हेड कांस्टेबल: क्रेन के किराए के 2,500 रुपए, पेट्रोल और खाने के खर्च के 2,500 रुपए देने होंगे। -परिवादी: साहब, खर्च आधा-आधा दे सकता हूं। 1,000 रुपए अलग से दे दूंगा। हेड कांस्टेबल: नहीं...ऐसा नहीं होता, 5 हजार रुपए देने होंगे। -परिवादी: नहीं साहब हेड कांस्टेबल: चलो, 3 हजार रुपए दे देना उसके बाद तेरा ऑटो मिल जाएगा। सहमति मिलने के बाद पीड़ित थाने से ऑटो को बाहर लेकर आ गया। इधर, कांस्टेबल को कुछ शक हुआ तो उसने कहा कि तू इंतजार कर मैं अभी आता हूं। फोन करूंगा तब रुपए देना मुझे। एसीबी टीम काफी देर तक इंतजार करती रही, लेकिन हेड कांस्टेबल रिश्वत की राशि लेने नहीं पहुंचा।