किशनगढ़ एयरपोर्ट पर ट्रेनिंग के दौरान विमान का बायां टायर हवा में ही टूटने और दो पहियों पर प्लेन की तिरछी लैंडिंग कराने की जांच डीजीसीए ने शुरू कर दी है। इसी बीच इस पूरे घटनाक्रम पर अब डॉक्यूमेंट्री तैयार की जा रही है, ताकि देशभर के एविएशन स्कूलों में इसको बताकर ट्रेनिंग दी जा सके।सबसे खास बात यह है कि प्लेन में सवार पायलट प्रशिक्षक कैप्टन तनीष कासवान किशनगढ़ के अवयाना एविएशन अकादमी से ही पढ़े हैं। उन्होंने फरवरी-मार्च 2025 में ट्रेनिंग पूरी की थी। इसके बाद अकादमी में ही असिस्टेंट फ्लाइट इंस्ट्रक्टर के रूप में नियुक्त थे। उनका सिलेक्शन इंडिगो एयरलाइन में भी हो चुका है। अकादमी की मैनेजिंग डायरेक्टर भार्गवी सेठ ने बताया कि घटना के समय विमान में करीब 170 लीटर ईंधन था। करीब 400 मीटर के लैंडिंग रोल के दौरान विमान को नियंत्रित रखा और क्षतिग्रस्त हिस्से को पर्याप्त गति कम होने के बाद ही रनवे पर आने दिया गया। जब प्लेन उड़ रहा था, तब देशभर से 2 हजार तकनीकी अधिकारी अपने राडार पर मॉनिटरिंग कर रहे थे। भार्गवी सेठ बताती हैं कि इस पूरे घटनाक्रम को केस स्टडी के रूप में तैयार किया जा रहा है। डीजीसीए की जांच में तकनीकी कारण सामने आने के बाद यह दस्तावेज पायलटों और एयरपोर्ट की इमरजेंसी टीमों के लिए उपयोगी प्रशिक्षण सामग्री बन सकता है। पायलट के नियंत्रण से विमान भी सुरक्षित, रनवे को भी नुकसान नहीं: भार्गवी सेठ के अनुसार, किसी भी प्लेन को दो पहियों पर लैंडिंग कराना काफी मुश्किल काम है। इस दौरान सबसे बड़ी चुनौती विमान की दिशा पर नियंत्रण बनाए रखना था। क्षतिग्रस्त हिस्से के अचानक रनवे से संपर्क में आने पर विमान के एक तरफ झुकने और दिशा बदलने का खतरा था, लेकिन कैप्टन तनीष ने विमान की गति कम करते हुए उसे नियंत्रित रखा। परिणामस्वरूप विमान सुरक्षित रुक गया और दोनों पायलट पूरी तरह सुरक्षित रहे। हालांकि ट्रेनिंग में इसकी पढ़ाई कराई जाती है, लेकिन प्रैक्टिकल संभव नहीं होता।