भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अधीन साहित्य अकादेमी की ग्रामालोक योजना के तहत निकटवर्ती गांव महियांवाली के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में रविवार को राजस्थानी काव्य गोष्ठी हुई। इसमें अलग-अलग रसों की कविताएं सुनाई गईं। कविताओं में जहां राजस्थानी माटी की महक बिखरी, वहीं, किसान-बेटी की पीड़ा भी छलकी। गोष्ठी की शुरुआत भरत राजा ने की। उन्होंने राजस्थानी गजल ‘ना मिलसी तकड़ां-तकड़ां में, बात जकी आं फक्कड़ां में, थे बस मेरा शे''र सुणो जी, के पड़्यो आं कपड़ा में’ सुनाई। इसके बाद रमेश कुमार ने हास्य कविताएं। किसान की पीड़ा पर कविता ‘किसान रै बेटे री जवानी सोखी कोनी, खेती पर लिखणी आ कहानी सोखी कोनी, ना दिन देखै, ना रात देखे, जद काम हुवै, जद ई तो कैवूं, करणी आ किसानी सोखी कोनी ’ सुनाई।