नगर परिषद चुनाव के नतीजों ने दैनिक भास्कर के चुनाव से पहले किए गए आंकलन को सही साबित कर दिया। भास्कर ने मतदान से पहले ही लगातार अपने चुनावी विश्लेषण में यह संकेत दिया था कि धौलपुर नगर परिषद में किसी एक राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत मिलने नहीं मिलने का दावा किया था। वहीं निर्दलीय प्रत्याशी बोर्ड गठन में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। सोमवार को आए परिणामों ने इसी पर मुहर लगा दी। 60 वार्डों वाली नगर परिषद में कांग्रेस 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी है,लेकिन बहुमत के लिए जरूरी 31 सीटों से चार सीट दूर है। भाजपा को 11, बसपा को 3 और निर्दलीयों को 19 सीटें मिली हैं। यानी परिणाम के बाद सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि कौन सबसे बड़ी पार्टी बनी,बल्कि 31 के आंकड़े तक कौन और कैसे पहुंचेगा। पॉलिटेक्निक कॉलेज में सोमवार सुबह 8 बजे शुरू हुई मतगणना आठ राउंड तक चली। 60 वार्डों के परिणाम आने के बाद परिषद की सत्ता का समीकरण साफ हो गया। कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन बहुमत से पीछे रह गई। भाजपा भी बहुमत के आंकड़े से काफी दूर है। ऐसे में निर्दलीयों के समर्थन के बिना किसी भी दल के लिए बोर्ड बनाना आसान नहीं होगा। चुनाव प्रचार के दौरान ही भास्कर ने वार्डवार समीकरण,प्रत्याशियों की स्थिति और स्थानीय राजनीतिक माहौल का आकलन करते हुए यह संभावना सामने रखी थी कि कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधी बहुमत की लड़ाई के बजाय निर्दलीय और बागी परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं। भास्कर के चुनावी विश्लेषण में यह भी सामने आया था कि दोनों प्रमुख दलों के दावे अपनी जगह हैं,लेकिन 60 वार्डों में मुकाबला इतना बिखरा हुआ है कि किसी एक दल के लिए 31 का आंकड़ा पार करना आसान नहीं होगा। परिणाम में कांग्रेस 27 पर रुकी और 19 निर्दलीयों की जीत ने आकलन मजबूत कर दिया। 19 निर्दलीय बने 'किंगमेकर', कुल सीटों का करीब 32% :- 19 निर्दलीयों की जीत इस चुनाव का सबसे बड़ा फैक्टर है। 60 वार्डों में 19 सीटें यानी करीब 32 फीसदी सीटें निर्दलीयों के खाते में गई हैं। बहुमत के लिए कांग्रेस को कम से कम चार और पार्षदों की जरूरत है। यही वजह है कि सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद कांग्रेस को अब निर्दलीयों का समर्थन जुटाना होगा। इस बार निर्दलीय किंगमेकर: - पिछली बार भी परिषद में स्पष्ट बहुमत नहीं आया था और बोर्ड गठन में निर्दलीयों की भूमिका महत्वपूर्ण रही थी। इस बार भी परिणाम उसी दिशा में गया है। अंतर यह है कि इस बार 19 निर्दलीय जीतकर आए हैं, इसलिए उनका सामूहिक महत्व और बढ़ गया है। अब शुरू होगा''31''का खेल:- चुनाव परिणाम ने सत्ता की पहली तस्वीर तो साफ कर दी है, लेकिन अंतिम तस्वीर अभी बाकी है। कांग्रेस के 27 पार्षदों के साथ चार निर्दलीय जुड़ते ही वह बहुमत के आंकड़े तक पहुंच सकती है। दूसरी ओर भाजपा को अपने 11 के आंकड़े से आगे निकलने के लिए कहीं ज्यादा पार्षदों को साथ लाना होगा। इसलिए अगले कुछ दिन समर्थन और पार्षदों को एकजुट रखने की राजनीति के लिहाज से अहम होंगे।