कांग्रेस ने पकड़ी भाजपा की कमजोरी नगर निगम चुनाव के आए नतीजों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। 2009 में जब सीधे मेयर के चुनाव हुए थे तब कांग्रेस के भवानी शंकर शर्मा मेयर चुने गए थे। इसके बाद अब करीब 17 साल के लंबे अंतराल के बाद बीकानेर में एक बार फिर कांग्रेस का मेयर बनने जा रहा है। इस चुनाव में कांग्रेस ने पूर्ण बहुमत हासिल करते हुए 42 सीटों पर शानदार जीत दर्ज की है, जबकि सत्ताधारी दल भाजपा सिर्फ 27 सीटों पर सिमट कर रह गई। इस बंपर जीत के पीछे के कारणों की जब ग्राउंड रिपोर्ट और राजनीतिक विश्लेषकों से पड़ताल की गई, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। रिसर्च में यह साफ हुआ कि राज्य सरकार की एंटीइनकंबेंसी (सत्ता विरोधी रुझान) और भाजपा के भीतर की भयंकर गुटबाजी ही कांग्रेस की इस बड़ी जीत का मुख्य आधार बनी। चुनाव से पहले टिकट वितरण को लेकर भाजपा में भारी असंतोष और फूट साफ नजर आ रही थी। पार्टी के भीतर टिकटों के बंटवारे को लेकर बगावत इस कदर हावी थी कि कई वार्डों में पार्टी के अपने ही बागी उम्मीदवार मैदान में ताल ठोकते नजर आए। वार्ड 50 का टिकट वितरण का मामला तो राष्ट्रीय स्तर तक चर्चा का विषय बन गया था। इसके विपरीत टिकट वितरण में कुछ ऐसी ही खींचतान कांग्रेस के भीतर भी थी, लेकिन कांग्रेस ने डैमेज कंट्रोल करते हुए अंदरूनी रणनीतिक चालें चलनी शुरू कर दीं। कांग्रेस ने भाजपा की इसी अंदरूनी फूट और गुटबाजी की सटीक नब्ज पकड़ ली थी। पार्टी रणनीतिकारों ने भाजपा द्वारा जारी की गई उम्मीदवारों की सूचियों का गहन परीक्षण किया और यह थाह लिया कि कौन सा उम्मीदवार किस नेता के खेमे से ताल्लुक रखता है। कांग्रेस ने बेहद खामोशी से भाजपा के असंतुष्टधड़ों और दूसरे गुटों को साधना शुरू कर दिया, जिसका फायदा उन्हें सीधा मतदान के दिन मिला। मेयर पद की लालसा और अपनों की ही घेराबंदी राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा की हार का सबसे बड़ा कारण पार्टी के भीतर मौजूद मेयर पद के दावेदारों की आपसी खींचतान रही। टिकट वितरण से लेकर चुनाव प्रचार तक, भाजपा के कई बड़े नेता और मेयर पद के तमाम दावेदार परोक्ष रूप से अपनी ही पार्टी के विरोधी गुट के प्रत्याशियों को हराने में जुटे रहे। हर कोई यह अंदरूनी गणित बैठा रहा कि यदि दूसरा गुट हार जाएगा तो अगला नंबर स्वतः उसका आ जाएगा। बड़े नेताओं की इसी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा और भीतरघात ने भाजपा के गढ़ को अंदर से खोखला कर दिया, और कांग्रेस बिना किसी बड़े राज्य स्तरीय राष्ट्रीय चेहरे के भी आसानी से बाजी मार ले गई। दिलचस्प बात यह रही कि भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने के लिए मुख्यमंत्री खुद बीकानेर में रोड शो करने आए और कई बड़े दिग्गज नेताओं ने ताकत झोंकी। इसके उलट, कांग्रेस की तरफ से स्टार प्रचारकों या राज्य स्तर के किसी बड़े पदाधिकारी ने चुनाव प्रचार में विशेष दखल नहीं दिया। कांग्रेस ने इस चुनाव को पूरी तरह स्थानीय स्तर पर लड़ा। स्थानीय स्तर पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं बीडी कल्ला, मदन मेघवाल और यशपाल गहलोत की तिकड़ी ने जिस प्रकार चुनावी प्रबंधन संभाला और एक-एक वार्ड के समीकरण को साधा उसी के दम पर पार्टी ने यह ऐतिहासिक जीत हासिल कर ली।