प्रदेश में किसानों को खाद आसानी से उपलब्ध हो, इस उद्देश्य से 25 अगस्त से शुरू की गई ऑनलाइन बिक्री व्यवस्था पर 23 दिन में ही रोक लगा दी गई है। प्रदेश के 18 जिलों में यह व्यवस्था लागू की गई थी। फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल (एफएफएस) के जरिए 23 दिन में ही 5.20 लाख क्विंटल यूरिया-डीएपी बिकने के बाद सरकार ने कदम वापस खींच लिए हैं। एफएफएस लागू होने के बाद कम समय में ही ज्यादा मात्रा में खाद बिकने पर कृषि विभाग ने आशंका जताई कि इसी गति से खरीद जारी रही तो आगामी रबी सीजन में खाद की किल्लत हो सकती है। व्यवस्था से जुड़ी 17 खामियां और समस्याएं चिह्नित करते हुए प्रमुख शासन सचिव मंजू राजपाल ने केंद्र सरकार को पत्र भी भेजा है। इसमें सबसे गंभीर बात यह रखी गई कि ऑनलाइन व्यवस्था में एक किसान दूसरे किसान के खसरा नंबर पर भी खाद खरीद सकता है। दूसरे किसान का खसरा जोड़ देने पर उसे हटाने का विकल्प भी नहीं है। वहीं, कृषि विज्ञान केंद्र और अनुसंधान केंद्रों की जमीन भी ऑनलाइन बुकिंग में उपलब्ध नहीं हैं। ऐप में बार-बार आए ये संदेश किसानों और विक्रेताओं को ऐप में कई तकनीकी दिक्कतें हुईं। इनमें ‘इस क्यूआर कोड के लिए कोई वैध बुकिंग नहीं मिली’, ‘डीलर स्टॉक ब्लॉक है’, ‘उपलब्ध मात्रा से ज्यादा खरीद’, ‘यह क्यूआर कोड प्रतिनिधि/अन्य मोड में बुक है’ और ‘बुकिंग के प्रयास में संदिग्ध गतिविधि’ जैसे संदेश शामिल हैं। इन जिलों में शुरू की गई थी ऑनलाइन खरीद खाद की ऑनलाइन खरीद की सुविधा पहले राजसमंद और सिरोही में प्रयोग के तौर पर शुरू की गई थी। इसके बाद 25 अगस्त को बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, चूरू, धौलपुर और बूंदी, 27 अगस्त को बारां, दौसा, हनुमानगढ़, डूंगरपुर, जालोर, झालावाड़, करौली, कोटा, प्रतापगढ़, सवाई माधोपुर और टोंक में व्यवस्था लागू की गई। अब 19 सितंबर से इसे आगामी आदेश तक स्थगित कर दिया गया है।