उदयपुर में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (माशिबो) के अध्यक्ष हनुमान सिंह राठौड़ ने परिवार और समाज में अपनत्व, त्याग और मानवीय मूल्यों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्वार्थ में जीने वाला समाज धीरे-धीरे मानवता का साथ भूल जाता है। परिवार के मजबूत निर्माण के लिए त्याग और अपनत्व की भावना जरूरी है। उन्होंने सामाजिक जीवन में आपसी सहयोग और मानवीय संवेदनाओं को बनाए रखने का संदेश दिया। अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख हस्तीमल हिरण की स्मृति में रविवार शाम को उदयपुर में हस्तीमल व्याख्यानमाला के अंतर्गत 'हम भारत के लोग' विषयक व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित हुआ। पाथेय कण संस्थान, विश्व संवाद केंद्र एवं रवींद्रनाथ टैगोर आयुर्विज्ञान महाविद्यालय, उदयपुर संयुक्त तत्वावधान में हुए कार्यक्रम के मुख्य वक्ता माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष हनुमान सिंह राठौड़ रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता पाथेय कण संस्थान के अध्यक्ष और हरिदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो नंदकिशोर पांडे ने की। रवीन्द्रनाथ टैगोर आयुर्विज्ञान महाविद्यालय उदयपुर के प्राचार्य एवं नियंत्रक डॉ राहुल जैन एवं विश्व संवाद केंद्र उदयपुर के अध्यक्ष कमल प्रकाश रोहिला भी मंचासीन रहे। मुख्य वक्ता हनुमान सिंह राठौड़ ने 'हम भारत के लोग' विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने भारत की राष्ट्रीय पहचान, भारतीय चिंतन परंपरा और 'मैं' से 'हम' बनने की यात्रा पर विस्तार से विचार व्यक्त किए। राठौड़ ने कहा कि आज दुनिया के सामने यह प्रश्न महत्वपूर्ण बन गया है कि ‘हम कौन हैं?’ राष्ट्रीय पहचान को लेकर जिस प्रकार का संकट दिखाई दे रहा है, उस पर गंभीर चिंतन की आवश्यकता है। भारत के संदर्भ में भी हमें विचार करना होगा कि ‘मैं’ से ‘हम’ कैसे बने और ‘हम’ की अनुभूति का आधार क्या है। उन्होंने भारतीय दर्शन का उल्लेख करते हुए उपनिषदों का उदाहरण देते हुए कहा कि संसार में दिखाई देने वाली प्रत्येक वस्तु में ईश्वर के अंश को देखने की दृष्टि प्रदान करती है। त्यागपूर्ण जीवन और समष्टि के प्रति संवेदनशीलता से ही ‘मैं’ से ‘हम’ की यात्रा प्रारंभ होती है। त्याग और अपनत्व से परिवार का होता है निर्माण राठौड़ ने कहा कि भारत का चिंतन केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार, समाज और संपूर्ण विश्व को एक इकाई के रूप में देखने की दृष्टि देता है। भारत में कुटुंब भाव इसी चिंतन का परिणाम है। त्याग और अपनत्व से परिवार का निर्माण होता है और यही भावना आगे बढ़कर ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के रूप में संपूर्ण विश्व को अपना परिवार मानने की प्रेरणा देती है। राठौड़ ने कहा कि जो केवल स्वयं के लिए सोचता और स्वयं के लिए जीता है, वह समाज और मानवता के प्रति अपने दायित्व से विमुख हो जाता है। विभिन्न विचारधाराओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया को विभिन्न वर्गों और समूहों में बांटने वाली प्रवृत्तियों के विपरीत भारतीय चिंतन समस्त संसार के कल्याण की भावना को सामने रखता है। उन्होंने कहा कि ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’, ‘प्राणियों में सद्भावना हो’ और ‘विश्व का कल्याण हो’ जैसी भावनाएं भारतीय जीवन-दर्शन की व्यापकता को दर्शाती हैं। जो व्यक्ति केवल अपने समूह या अपने हित की चिंता करता है, वह ‘हम’ के भाव को विकसित नहीं कर सकता। ‘हम’ का भाव तभी विकसित होगा, जब व्यक्ति पूरे समाज और विश्व के हित के बारे में चिंतन करेगा। इस दौरान महेंद्र सिंहल ने कहा कि संस्थान द्वारा साहित्य, सामाजिक जागरण और राष्ट्रहित से जुड़े विषयों पर निरंतर कार्य किया जा रहा है। महर्षि दधीचि देहदान सम्मान समारोह भी आयोजित किया गया। इसमें पिछले वर्षों में देहदान करने वाले परिवारों का सम्मान किया। वर्ष 2025-26 में दिवंगत देहदानी रवि खमेसरा, पुष्पा देवी, मुरारी लाल अग्रवाल, सकु बाई जी, प्रह्लाद कुमार सुहालका, धर्मदेव चौबे, कुसुमबाई चावत, चन्द्रा खमेसरा, सुशीला जैन, संध्या नाहर, नाथू लाल चंडालिया, आशु लाल कुरडिया, बसंती लाल पगारिया, रोशन लाल हिरण व इला चक्रवर्ती के परिजनों का सम्मान किया गया। जिला चिकित्सालय अम्बामाता की प्रभारी डॉ. नाजिमा व शरीर रचना विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. श्वेता अस्थाना भी उपस्थित रहे। प्रोफेसर नंदकिशोर पांडे द्वारा अध्यक्षीय उद्बोधन करते हुए पाठ्यक्रम से संबंधित जानकारी प्रदान की गई। नृत्य-सृष्टि समूह के कलाकारों द्वारा आराधना स्वरूप शास्त्रीय नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी गई। संचालन डॉ. सुनील खटीक, डॉ. सुनील शर्मा ने किया तो धन्यवाद विकास छाजेड़ ने दिया। हनुमान चौहान ने पुस्तक परिचय कराया और शैलेश चौरड़िया ने दिवंगत हस्तीमल के जीवन पर प्रकाश डाला।