उदयपुर नगर निगम में सातवीं बार फिर भाजपा का बोर्ड बनेगा। इस बार कुल 80 में से 53 वार्डों में जीत के बाद भाजपा में अब शहर का प्रथम नागरिक बनने की मशक्कत तेज हो गई है। बीजेपी के मेयर और डिप्टी पद के रेस में शामिल सभी नेताओं के जीतने के बाद उन्होंने लॉबिंग तेज कर दी है। मेयर के लिए प्रमोद सामर, दिनेश भट्ट, पारस सिंघवी और अतुल चंडालिया में टक्कर में हैं। इस रेस में सबसे प्रमुख प्रमोर सामर और दिनेश भट्ट के नाम हैं। सूत्रों के अनुसार- पार्टी के नेता प्रमोद सामर को मेयर और दिनेश भट्ट को डिप्टी मेयर बनाने पर अंदरूनी मंथन कर रहे हैं। राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया के दोनों दामादों के भाई आकाश-अतुल इस बार चुनाव में जीत गए हैं। ऐसे में इनमें से किसी एक को डिप्टी मेयर बनाने की चर्चा तेज है। इनके डिप्टी मेयर बनने की सहमति पर पार्टी मेयर पद पर दिनेश भट्ट के नाम को फाइनल कर सकती है। इस दौड़ में भट्ट एक मात्र ब्राह्मण चेहरा हैं। वहीं जैन समाज के प्रमोद सामर, पारस सिघंवी, अतुल चंडालिया जैसे चर्चित नाम हैं। विधायक-शहर जिलाध्यक्ष के जरिए कर रहे लॉबिंग पूर्व डिप्टी मेयर पारस सिंघवी भी बाड़ेबंदी में अपनी गणित से संख्या बल जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं पंकज बोराणा भी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के जरिए डिप्टी मेयर के लिए लॉबिंग करवा रहे हैं। मेयर-डिप्टी मेयर पद के लिए संभावित नाम शहर विधायक ताराचंद जैन और शहर जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह राठौड़ के जरिए अपनी लॉबिंग हो रही हैं। बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष अलका मूंदड़ा भी दिनेश भट्ट के लिए जयपुर से दिल्ली तक पैरवी करवाने में पीछे नहीं है तो पारस सिंघवी के लिए भी RSS के कई पदाधिकारी लॉबिंग कर उनके नाम को आगे बढ़ा रहे हैं। उधर, कई केंद्रीय मंत्री समेत पार्टी के कई बड़े नेता महापौर के लिए प्रमोद सामर के नाम की पैरवी कर रहे हैं। इस बार पार्टी के कई बड़े चेहरों के जीते हैं। ऐसे में सिर्फ मेयर और डिप्टी मेयर की नहीं, बल्कि आधा दर्जन बड़ी समितियों के नाम पर खासी मशक्कत होनी तय हैं। कांग्रेस के भी यह बड़े चेहरे चुनाव जीते, बन सकते नेता प्रतिपक्ष इस बार नगर निगम चुनाव में कांग्रेस 23 वार्डों में जीती है। शहर जिलाध्यक्ष फतेहसिंह राठौड़ की पत्नी पूनम कंवर, पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत डॉ. गिरिजा व्यास के भाई की बहू हितांशी शर्मा, अरुण टांक और शंकर चंदेल जैसे बड़े चेहरे जीते हैं। बीजेपी के बोर्ड बनने पर कांग्रेस इन पार्षदों में किसी एक को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मौका दे सकती है।
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