अमेरिका और रूस के बीच तनाव के बीच अमेरिकी वायुसेना का एक बड़ा मिलिट्री प्लेन मंगलवार को मॉस्को में उतरा। C-17A ग्लोबमास्टर III की इस लैंडिंग ने इसलिए ध्यान खींचा, क्योंकि रूस की राजधानी में किसी अमेरिकी सैन्य विमान का पहुंचना बेहद असामान्य है। अब सवाल उठ रहा है कि आखिर इस विमान को रूस क्यों भेजा गया? फ्लाइट-ट्रैकिंग मॉनिटर के मुताबिक, प्लेन ने मॉस्को के समय के अनुसार सुबह करीब 8:50 बजे लातविया की राजधानी रीगा से उड़ान भरी और लगभग 74 मिनट बाद मॉस्को पहुंचा। इस उड़ान की एक और खास बात यह रही कि विमान रूस के हवाई क्षेत्र से होकर मॉस्को पहुंचा। किसी अमेरिकी सैन्य विमान को इस रास्ते से उड़ान भरने के लिए रूसी अधिकारियों की मंजूरी जरूरी होती है। प्लेन के मिशन पर अब भी सस्पेंस रिकॉर्ड के मुताबिक, यही विमान 23 अगस्त को अमेरिका के वॉशिंगटन डीसी के पास मौजूद जॉइंट बेस एंड्रयूज से रीगा पहुंचा था। यह वही अमेरिकी सैन्य अड्डा है जहां राष्ट्रपति के विमानों का बेड़ा रहता है। इसमें एयर फोर्स वन भी शामिल है। हालांकि, अभी तक अमेरिका और रूस दोनों ने यह नहीं बताया है कि विमान को मॉस्को क्यों भेजा गया। यह भी पता नहीं चला है कि विमान में कौन था या उसके अंदर क्या सामान था। अमेरिकी सैन्य विमान का मॉस्को में उतरना आम बात नहीं है। इसी वजह से विमान पर नजर रखने वाले लोगों और सोशल मीडिया यूजर्स के बीच तरह-तरह की बातें होने लगीं। कुछ लोगों ने अंदाजा लगाया कि विमान का इस्तेमाल कैदियों की अदला-बदली, यूक्रेन युद्ध को लेकर किसी गुप्त बातचीत या अमेरिकी दूतावास से जुड़े किसी काम के लिए किया गया हो सकता है। अमेरिकी सैन्य विमानों पर नजर रखने वाले एक सोशल मीडिया यूजर ने भी इस उड़ान को बेहद असामान्य बताया और सवाल किया कि आखिर अमेरिकी सैन्य विमान मॉस्को क्यों पहुंचा। लेकिन अभी तक इनमें से किसी भी बात की पुष्टि नहीं हुई है। यानी फिलहाल यह साफ नहीं है कि विमान को मॉस्को भेजने की असली वजह क्या थी। C-17 ग्लोबमास्टर- टैंक से सैनिकों तक ले जाने में सक्षम C-17A ग्लोबमास्टर III अमेरिकी वायुसेना का बहुत बड़ा सामान ढोने वाला सैन्य विमान है। इसका इस्तेमाल सैनिकों, सैन्य गाड़ियों और भारी सामान को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए किया जाता है। इस विमान को बोइंग ने बनाया है। इसकी लंबाई करीब 174 फीट और दोनों पंखों की चौड़ाई करीब 170 फीट है। यह विमान करीब 1,70,900 पाउंड यानी लगभग 77 टन वजन ले जा सकता है। इसमें एक साथ 102 पूरी तरह तैयार पैराट्रूपर्स या करीब 69 टन वजन वाला M1 अब्राम्स टैंक ले जाया जा सकता है। इसकी उड़ने की सामान्य रफ्तार करीब 518 मील प्रति घंटा है। ज्यादा से ज्यादा वजन के साथ यह बिना दोबारा ईंधन लिए करीब 2,760 मील तक उड़ सकता है। हवा में ही ईंधन भरने की सुविधा मिलने पर यह इससे कहीं ज्यादा दूरी तय कर सकता है। इतना बड़ा विमान होने के बावजूद C-17 करीब 3,500 फीट लंबी रनवे से भी उड़ान भर सकता है और उतर सकता है। इसकी एक खासियत यह भी है कि यह अपनी ताकत से पीछे की ओर भी चल सकता है। अमेरिकी वायुसेना इसका इस्तेमाल कहां करती है? C-17 का काम सिर्फ सैनिकों और हथियारों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना नहीं है। अमेरिकी वायुसेना इसका इस्तेमाल सैनिकों और सामान को पहुंचाने, हवा से सामान गिराने, घायल लोगों को बाहर निकालने और जरूरत के समय मदद पहुंचाने के लिए भी करती है। यह कोई लड़ाकू विमान या बम गिराने वाला विमान नहीं है। इसका मुख्य काम भारी सामान और सैन्य उपकरणों को जल्दी एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाना है। विमान में क्या था, अभी पता नहीं मॉस्को जाने वाला यह विमान RCH4555 नाम से उड़ रहा था। सार्वजनिक फ्लाइट जानकारी से यह पता चलता है कि विमान कहां से चला और किस रास्ते से मॉस्को पहुंचा। लेकिन विमान में कौन था और उसके अंदर क्या सामान था, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। यही वजह है कि रूस और अमेरिका के बीच तनाव के इस दौर में इस उड़ान ने इतना ध्यान खींचा है। फिलहाल कैदियों की अदला-बदली, रूस-अमेरिका के बीच किसी खास बातचीत या अमेरिकी दूतावास से जुड़े काम जैसी बातें सिर्फ अंदाजे हैं। इनमें से किसी की भी पुष्टि नहीं हुई है। जब तक अमेरिका या रूस की तरफ से कोई जानकारी नहीं आती, तब तक यह साफ नहीं होगा कि अमेरिकी C-17 विमान को अचानक मॉस्को भेजने की असली वजह क्या थी।