वन स्टेट-वन इलेक्शन फॉर्मूले के पहले चुनाव में ही कांग्रेस बिखर गई। 2026 के चुनावों में कांग्रेस पार्टी के सिंबल से चुनाव लड़े और जीते 346 पार्षदों ने पार्टी से ही बगावत कर दी। इतनी संख्या में बगावत पहले नहीं हुई। 113 निकायों में पार्टी के खिलाफ जाकर 346 पार्षदों द्वारा बीजेपी को वोट करने और क्रॉस वोटिंग का इस बार रिकॉर्ड बन गया। अजमेर और पाली के बाद कोटा नगर निगम में भी कांग्रेस के 4 पार्षदों ने क्रॉस वोटिंग कर दी। जिन-जिन निकायों में क्रॉस वोटिंग हुई, उनमें कांग्रेस के मेयर या सभापति प्रत्याशी को पार्टी के पार्षदों की संख्या से कम वोट मिले और बीजेपी के प्रत्याशी को पार्टी के जीते पार्षदों से ज्यादा वोट मिल गए। यानी कांग्रेस के पार्षदों ने ‘कमल खिला दिया’ और ‘हाथ का पंजा’ काटने का काम किया। पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा कहते रहे, जांच कराएंगे। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव के. सी. वेणुगोपाल स्वयं क्रॉस वोटिंग और बगावत से आहत होकर कांग्रेस वॉर रूम पहुंचे और जांच के आदेश दे गए। लेकिन असर नहीं दिखा। क्रॉस वोटिंग ने बीजेपी-कांग्रेस दोनों को दिखाया आइना नई क्रॉस वोटिंग से अंतर बढ़कर 30 वोट हो गया कोटा में मेयर चुनाव में भाजपा और कांग्रेस मेयर प्रत्याशियों में जीत-हार का अंतर 30 का रहा। जबकि दोनों के पार्षदों की संख्या में 20 का अंतर था। भाजपा के 57 पार्षद जीते और मेयर को 65 वोट मिले। कांग्रेस के 39 पार्षद थे, मेयर प्रत्याशी को 35 वोट ही मिले। कांग्रेस के 4 पार्षदों ने बिना जरूरत के भी बीजेपी का साथ दिया और क्रॉस वोटिंग कर दी। 113 में क्रॉस वोटिंग, जांच सिर्फ 6 निकायों की पीसीसी की तरफ से क्रॉस वोटिंग और पार्टी के साथ बगावत को लेकर रिपोर्ट तलब की गई है। लेकिन क्रॉस वोटिंग 113 निकायों में हुई। पार्टी जांच सिर्फ 6 निकायों की करवा रही है। पार्टी की तरफ से भीलवाड़ा, बाड़मेर, धौलपुर, पाली, बीकानेर और अजमेर की रिपोर्ट मांगी गई है। इस संबंध में पार्टी के पदाधिकारियों ने कहा कि क्रॉस वोटिंग की बड़े स्तर पर जांच होगी। दिल्ली से नए निर्देश आने के बाद नए सिरे से कार्रवाई होगी।